UP News: बदायूं में ₹18.18 करोड़ का बजट पड़ा, महीनों बाद भी 5500 श्रमिकों को मजदूरी का इंतजार; जानिए पूरा मामला

मुख्य बिंदु:
- शासन ने 14 अगस्त को ही बदायूं जिले के लिए जारी किए थे ₹18 करोड़ 18 लाख 65 हजार 477 रुपये।
- बजट आवंटित होने के हफ्तों बाद भी वीबी जीरामजी योजना के करीब 5,500 श्रमिकों के खातों में नहीं पहुंची मजदूरी।
- नियम: मस्टर रोल बंद होने के 15 दिन के भीतर भुगतान अनिवार्य, 16वें दिन से प्रतिदिन 0.05% मुआवजा देने का प्रावधान।
- डीडीओ का बयान: आधार-आधारित भुगतान के लिए ब्लॉकों से मांगा गया है डाटा, जानकारी अधूरी होने से हो रही देरी।
बदायूं (उत्तर प्रदेश)।: सरकारी योजनाओं में पसीना बहाने वाले गरीब और ग्रामीण श्रमिकों के हक पर प्रशासनिक लेटलतीफी भारी पड़ रही है। बदायूं जिले में 'वीबी जीरामजी योजना' के तहत महीनों से हाड़-तोड़ मेहनत करने वाले करीब 5,500 मजदूर आज भी अपनी गाढ़ी कमाई का इंतजार कर रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि शासन स्तर से 14 अगस्त को ही जिले के लिए 18 करोड़ 18 लाख 65 हजार 477 रुपये की भारी-भरकम धनराशि जारी की जा चुकी है। इसके बावजूद पर्याप्त बजट होने पर भी यह राशि मजदूरों के बैंक खातों तक नहीं पहुंच सकी है।
15 दिन में भुगतान अनिवार्य, 16वें दिन से मुआवजे का नियम
योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार, पूरी प्रक्रिया के लिए एक समय-सीमा तय की गई है:
श्रमिकों की दैनिक हाजिरी मस्टर रोल में दर्ज होती है।
कार्य अवधि समाप्त होने पर मस्टर रोल बंद कर कार्य की पैमाइश (Measurement) की जाती है और विवरण प्रबंधन सूचना प्रणाली (MIS) पर अपलोड होता है।
इसके बाद मजदूरी सूची का सत्यापन कर फंड ट्रांसफर ऑर्डर (FTO) जनरेट किया जाता है।
अधिकृत अधिकारियों के डिजिटल हस्ताक्षर और द्वितीय स्तर (2nd Level) की तकनीकी स्वीकृति के बाद डीबीटी (DBT) के जरिए राशि सीधे बैंक या डाकघर खातों में ट्रांसफर होती है।
मुआवजे का स्पष्ट प्रावधान:
नियमों के तहत मस्टर रोल बंद होने की तिथि से अधिकतम 15 दिनों के भीतर मजदूरी सीधे खाते में पहुंचना अनिवार्य है। यदि 15 दिन में भुगतान नहीं होता है, तो 16वें दिन से श्रमिकों को प्रतिदिन के हिसाब से बकाया राशि का 0.05 प्रतिशत विलंब मुआवजा (Delay Compensation) देना होता है।
लापरवाही किसकी? श्रमिकों ने उठाया जवाबदेही का सवाल
महीनों से बैंक और दफ्तरों के चक्कर काट रहे श्रमिकों का कहना है कि जब उन्होंने भीषण गर्मी और बारिश के बीच अपना काम समय पर पूरा कर दिया, तो भुगतान में देरी क्यों हो रही है?
मजदूरों ने सवाल उठाया है कि:
जब 14 अगस्त को ही ₹18.18 करोड़ का बजट आ चुका है, तो मस्टर रोल से लेकर एफटीओ जनरेशन और डिजिटल सिग्नेचर की फाइलें किस स्तर पर अटकी हैं?
क्या निर्धारित 15 दिन की समय-सीमा बीतने के बाद उन्हें नियमानुसार 0.05% दैनिक मुआवजा दिया जाएगा?
प्रक्रिया में जानबूझकर देरी करने वाले लापरवाह कर्मचारियों और अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होगी?
अधिकारी का बयान: ब्लॉकों से पूरा डाटा न मिलना बनी देरी की वजह
इस पूरे मामले पर जिला विकास अधिकारी (DDO) मनोज कुमार सिंह ने बताया कि तकनीकी सत्यापन की वजह से भुगतान प्रक्रिया में समय लग रहा है।
"वीबी जीरामजी योजना के तहत अब श्रमिकों को आधार आधारित भुगतान (Aadhaar Based Payment System) किया जाना है। शासन स्तर से धनराशि जिले को प्राप्त हो चुकी है। सभी विकास खंडों (ब्लाकों) से प्रत्येक श्रमिक की आवश्यक जानकारी और बैंक-आधार सीडिंग का ब्यौरा मांगा गया है। कुछ ब्लॉकों से अभी पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है। डाटा का सत्यापन पूरा होते ही सभी श्रमिकों के खातों में सीधे डीबीटी के माध्यम से भुगतान भेज दिया जाएगा।"
— मनोज कुमार सिंह, जिला विकास अधिकारी (DDO), बदायूं
प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती
जिले में 5,500 से अधिक परिवारों की आजीविका इस मजदूरी पर टिकी हुई है। अब जिला प्रशासन और विकास विभाग के सामने न सिर्फ इस 18.18 करोड़ रुपये की राशि को तत्काल पात्र श्रमिकों के खातों में पहुंचाने की चुनौती है, बल्कि देरी के लिए जिम्मेदार स्तर को चिह्नित कर नियमानुसार विलंब मुआवजे के प्रावधान पर भी स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
