ISRO का मेगा मिशन: 4 सितंबर को लॉन्च होगी भारत की 'सुपर आई', 36,000 किमी की ऊंचाई से हर पल रखेगी देश पर नजर

हाइलाइट्स:
4 सितंबर को GSLV-F17 रॉकेट के जरिए लॉन्च होगा सबसे ताकतवर अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट 'EOS-5'.
36,000 किलोमीटर की ऊंचाई से देश की सीमाओं और मौसम की रियल-टाइम मॉनिटरिंग करेगा यह सैटेलाइट.
मार्च 2027 तक गगनयान के मानवरहित (G1) मिशन समेत कुल 7 बड़े मिशन लॉन्च करेगा ISRO.
नई दिल्ली/श्रीहरिकोटा:
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अंतरिक्ष में एक बार फिर भारत की ताकत का डंका बजाने जा रहा है। करीब 8 महीने के लंबे इंतजार के बाद, इसरो आगामी 4 सितंबर को देश का सबसे शक्तिशाली अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट 'EOS-5' (पूर्व में GISAT-1A) लॉन्च करने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस मिशन को भारत की अंतरिक्ष में तैनात होने वाली 'हॉकआई' (सुपर आई) कहा जा रहा है, जो 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई से देश की सीमाओं और बदलते मौसम पर 24 घंटे नजर रखेगी।
इसरो के चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन के अनुसार, 4 सितंबर की तड़के इसरो अपने भरोसेमंद जियो-सिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (GSLV-F17) के जरिए इस महत्वाकांक्षी उपग्रह को अंतरिक्ष में स्थापित करने का प्रयास करेगा।
अंतरिक्ष में भारत की 'तीसरी आंख': क्या है EOS-5 की खासियत?
EOS-5 को भू-स्थिर कक्षा (Geostationary Orbit) में पृथ्वी से लगभग 36,000 किमी की ऊंचाई पर स्थापित किया जाएगा। इस कक्षा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सैटेलाइट पृथ्वी की गति के साथ ही घूमेगा, जिससे यह लगातार भारत और उसके सीमावर्ती इलाकों पर अपनी नजर बनाए रखेगा।
रियल-टाइम तस्वीरें: यह सैटेलाइट पूरे दिन लगातार भारतीय भूभाग की हाई-रिज़ॉल्यूशन तस्वीरें भेजेगा।
मौसम और आपदा प्रबंधन: चक्रवात, अचानक आई बाढ़ (Flash Floods), बादल फटना और जंगलों में लगने वाली आग जैसी प्राकृतिक आपदाओं की पूर्व और त्वरित चेतावनी देने में यह मील का पत्थर साबित होगा।
राष्ट्रीय सुरक्षा: सीमा पार की गतिविधियों और सामरिक दृष्टिकोण से यह सुरक्षा एजेंसियों को अहम इनपुट मुहैया कराएगा।
2021 की नाकामी के बाद नई उम्मीद
यह मिशन इसरो के वैज्ञानिकों के लिए बेहद भावुक और महत्वपूर्ण है। इससे पहले 12 अगस्त 2021 को इसी तरह के सैटेलाइट (EOS-03) को लॉन्च करने का प्रयास किया गया था। हालांकि, उस समय GSLV-F10 रॉकेट के क्रायोजेनिक अपर स्टेज में आई तकनीकी खराबी के चलते मिशन असफल हो गया था। अब वैज्ञानिक पूरी तैयारी और उन्नत तकनीक के साथ EOS-5 के रूप में उस अधूरे सपने को साकार करने जा रहे हैं।
PSLV की रुकावट का GSLV पर कोई असर नहीं
हाल ही में पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) के दो मिशनों में आई तकनीकी दिक्कतों के बाद उसकी उड़ानों को जांच पूरी होने तक अस्थायी रूप से रोका गया है। हालांकि, इसरो ने स्पष्ट किया है कि EOS-5 मिशन पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इस सैटेलाइट को ले जाने वाला GSLV Mk II रॉकेट पूरी तरह अलग तकनीक पर आधारित है और इसका इंजन या प्रोपल्शन सिस्टम PSLV से पूरी तरह स्वतंत्र है। हाल ही में नासा-इसरो के संयुक्त 'NISAR' मिशन की सफल स्थापना ने GSLV की विश्वसनीयता को पहले ही साबित कर दिया है।
मार्च 2027 तक गगनयान समेत 7 बड़े मिशन
इसरो ने आने वाले वर्षों के लिए अपना महत्वाकांक्षी रोडमैप भी सामने रखा है:
गगनयान की तैयारी: मार्च 2027 तक इसरो कुल 7 बड़े अंतरिक्ष मिशन अंजाम देगा, जिसमें भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम 'गगनयान' का पहला बिना क्रू वाला (G1) मिशन भी शामिल है।
चालू वित्त वर्ष का लक्ष्य: वर्तमान वित्त वर्ष के दौरान इसरो ने 12 उपग्रहों के निर्माण और 8 लॉन्च व्हीकल मिशनों को पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
ये सभी आगामी मिशन संचार, नेविगेशन, पृथ्वी अवलोकन और वैज्ञानिक अनुसंधान में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ भविष्य के मानव अंतरिक्ष अभियानों की मजबूत नींव रखेंगे।
