नाराज फूफा' से लेकर 'राहुल मियां' तक: BJP और कांग्रेस में जुबानी जंग तेज

नई दिल्ली | आगामी विधानसभा चुनावों से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस के बीच राजनीतिक मर्यादाओं और व्यक्तिगत हमलों का नया दौर शुरू हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विपक्ष को 'नाराज फूफा' कहे जाने के बाद शुरू हुआ यह विवाद अब भाजपा नेता नितिन नबीन के राहुल गांधी को 'राहुल मियां' कहने तक पहुंच गया है। दोनों दलों के बीच एक बार फिर तीखे विशेषणों, तंज और बयानों की राजनीति गरमा गई है।
प्रधानमंत्री के बयान पर पलटवार करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि प्रधानमंत्री हर साल विपक्ष के लिए नए-नए विशेषण ढूंढकर लाते हैं, ताकि सरकार अपनी नाकामियों को छुपा सके। वहीं, 'राहुल मियां' वाले बयान और वंदे मातरम को लेकर हुए विवाद के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन करते हुए पुतले फूंके हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हालिया कार्यक्रमों में विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा था कि देश में जब भी कोई बड़ा विकास कार्य होता है, तो विपक्ष परिवार के उस 'नाराज फूफा' की तरह व्यवहार करने लगता है जो हर बात पर मुंह फुला लेता है।
पीएम ने कहा था कि चाहे स्टैच्यू ऑफ यूनिटी हो, वंदे भारत एक्सप्रेस, बुलेट ट्रेन या डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर—विपक्ष हर जगह सिर्फ कमियां ढूंढता है।
भाजपा ने इस तंज को आगे बढ़ाते हुए सोशल मीडिया पर एक व्यंग्यात्मक वीडियो भी जारी किया। भाजपा नेता नितिन नबीन ने इसका समर्थन करते हुए कहा कि विपक्ष चाहे जितना अड़ंगा लगाए, देश 2047 तक 'विकसित भारत' बनकर रहेगा।
प्रधानमंत्री के इस बयान पर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने तीखा हमला बोला। खड़गे ने कहा:
"मोदी जी के पास हर साल विपक्ष के लिए एक नया विशेषण होता है। कभी 'दिमागी नक्सल', कभी 'अर्बन नक्सल', कभी 'खान मार्केट गैंग' और अब 'नाराज फूफा'। विशेषण बदलते रहते हैं, लेकिन जनता की बदहाली और सरकार की नीतियां नहीं बदलतीं। यह सब सिर्फ महंगाई, बेरोजगारी और अपनी विफलताओं से ध्यान भटकाने की सोची-समझी रणनीति है।"
विवाद उस वक्त और गहरा गया जब भाजपा नेता नितिन नबीन ने हल्द्वानी में हुए वंदे मातरम विवाद का हवाला देते हुए राहुल गांधी पर हमला बोला और उन्हें 'राहुल मियां' कह दिया। नबीन ने आरोप लगाया कि विदेशी संस्कृति में पले-बढ़े होने के कारण राहुल गांधी वंदे मातरम का मर्म नहीं समझ सकते।
इस बयान पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा और देश के कई हिस्सों में नितिन नबीन के पुतले फूंके गए। कांग्रेस ने पलटवार करते हुए स्पष्ट किया:
वर्ष 1937 में कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह पर ही वंदे मातरम के पहले दो पदों को गाने का सर्वसम्मत फैसला लिया था।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को तोड़-मरोड़कर राष्ट्रगीत का राजनीतिक इस्तेमाल कर रही है।
ब्रिक्स सम्मेलन और 'छात्रों की गूंज' पर भी तकरार
यह तकरार यहीं नहीं थमी। ब्रिक्स (BRICS) सम्मेलन को लेकर कांग्रेस की आपत्तियों पर भी भाजपा ने उसे 'नाराज फूफा' करार दिया। भाजपा नेताओं ने कहा कि जी-20, एआई समिट हो या ब्रिक्स—देश की हर अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि पर कांग्रेस को केवल दर्द होता है।
दूसरी ओर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस के छात्र कार्यक्रम 'छात्रों की गूंज' पर तंज कसते हुए उसे 'झूठ की गूंज' करार दिया।
नैरेटिव की लड़ाई: चुनाव से पहले ध्रुवीकरण की बिसात?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दोनों दलों के बीच यह वार-पलटवार दरअसल आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर गढ़ा जा रहा नैरेटिव युद्ध है।
भाजपा इसे 'विकास बनाम नकारात्मकता' और 'राष्ट्रवाद बनाम तुष्टिकरण' के रूप में पेश कर रही है।
वहीं कांग्रेस इसे जनता के असल मुद्दों (रोजगार, महंगाई, आर्थिक असमानता) से भटकाने के लिए भाजपा द्वारा रची गई 'नामकरण और गाली-गलौज की राजनीति' साबित करने में जुटी है। आने वाले दिनों में यह चुनावी जंग सोशल मीडिया से लेकर चुनावी रैलियों के मंचों तक और तीखी होने के आसार हैं।
