दिमाग में लगा उपकरण अब बोली और इशारे दोनों पढ़ेगा, लकवाग्रस्त मरीजों के लिए नई उम्मीद

न्यूयॉर्क: जो लोग बोलने और हाथ हिलाने की क्षमता खो चुके हैं, उनके लिए अब तक बनी तकनीकें या तो शब्द पढ़ती थीं या हरकत। एक नए शोध में पहली बार ऐसा उपकरण आजमाया गया है, जो दिमाग के संकेतों से बोली और इशारा दोनों एक साथ पढ़ लेता है।
यह अध्ययन पत्रिका नेचर न्यूरोसाइंस में प्रकाशित हुआ है। इसमें मस्तिष्क के संवेदी-प्रेरक हिस्से पर 253 सूक्ष्म इलेक्ट्रोड लगाए गए, जो उस समय बनने वाली तंत्रिका गतिविधि को दर्ज करते हैं जब व्यक्ति कुछ कहने या कोई हरकत करने की कोशिश करता है। यही संकेत कंप्यूटर तक पहुँचकर शब्द और हाव-भाव में बदल दिए जाते हैं।
दो प्रतिभागियों पर हुआ परीक्षण
परीक्षण में दो लोग शामिल हुए। पहले प्रतिभागी को मस्तिष्क के निचले हिस्से में आघात के बाद लकवा हुआ था, जबकि दूसरे प्रतिभागी एएलएस नाम की तंत्रिका बीमारी से जूझ रहे हैं, जिसमें माँसपेशियों पर नियंत्रण धीरे-धीरे खत्म होता जाता है। दोनों के लिए पाँच-पाँच परीक्षण रखे गए थे।
- पहला प्रतिभागी: पाँच में से तीन परीक्षणों में सटीकता का माध्य आँकड़ा सौ प्रतिशत तक पहुँचा।
- दूसरा प्रतिभागी: बोली पढ़ने में 75 प्रतिशत और इशारे पहचानने में 85 प्रतिशत सटीकता दर्ज हुई।
- नतीजा कैसे दिखा: संकेतों को पर्दे पर बने पूरे कद के पुतलों के जरिए दिखाया गया, ताकि बोले गए शब्द और हाव-भाव साथ-साथ सामने आएँ।
अभी शुरुआती चरण
शोध दल का कहना है कि बातचीत सिर्फ शब्दों से पूरी नहीं होती। सिर हिलाना, कंधे उचकाना या हाथ के छोटे इशारे अर्थ बदल देते हैं, और इन्हें भी पढ़ पाना इस दिशा में बड़ा कदम है। मास्ट्रिख्ट विश्वविद्यालय के शोधकर्ता क्रिश्चियन हर्फ ने इसे उल्लेखनीय बताते हुए जोड़ा कि यह अभी सिद्धांत को जाँचने वाला अध्ययन है और इसे रोजमर्रा के इस्तेमाल तक पहुँचने में समय लगेगा।
वैज्ञानिकों के मुताबिक अगला काम इलेक्ट्रोड की संख्या घटाकर और उपकरण को छोटा बनाकर उसे लंबे समय तक भरोसेमंद बनाना है। अभी यह प्रयोगशाला में नियंत्रित परिस्थितियों में ही काम करता है, लेकिन नतीजे बताते हैं कि दिशा सही है।
