भारत और न्यूजीलैंड के बीच समुद्री सहयोग को नई गति, 2027 में पहला द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास

वेलिंगटन: भारत और न्यूजीलैंड की नौसेनाएं समुद्र में आपसी सहयोग बढ़ाने की तैयारी में हैं। भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन ने न्यूजीलैंड दौरे के दौरान अपने समकक्ष के साथ बातचीत में वर्ष 2027 में पहली बार होने वाले द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास समेत कई अहम विषयों पर चर्चा की।
एडमिरल स्वामीनाथन और रॉयल न्यूजीलैंड नेवी के प्रमुख रियर एडमिरल गैरीन गोल्डिंग के बीच हुई बातचीत में दोनों नौसेनाओं के बीच व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया। समुद्र में संयुक्त गतिविधियां बढ़ाने और समुद्री जानकारी को एक-दूसरे के साथ अधिक साझा करने पर भी सहमति बनी।
माओरी परंपरा से हुआ स्वागत
ऑकलैंड के डेवोनपोर्ट नौसैनिक अड्डे पर भारतीय नौसेना प्रमुख का पारंपरिक माओरी तरीके से स्वागत किया गया। यह स्वागत एचएमएनजेडएस फिलोमेल के ते ताउआ मोआना मारे में हुआ। माओरी समुदाय के इस पारंपरिक स्वागत को पोव्हिरी कहा जाता है, जो सम्मान जताने का खास तरीका है और रॉयल न्यूजीलैंड नेवी की पहचान का अहम हिस्सा भी।
पारंपरिक स्वागत के बाद रॉयल न्यूजीलैंड नेवी ने एडमिरल स्वामीनाथन को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। यह कार्यक्रम एचएमएनजेडएस फिलोमेल में हुआ, जिसे न्यूजीलैंड की नौसेना का घर भी कहा जाता है।
एक पुराने युद्धपोत की साझा कड़ी
समारोह में दोनों देशों की नौसेनाओं के पुराने रिश्तों की झलक भी दिखी। एचएमएनजेडएस एचिलीज का छह इंच का पुराना तोप टावर इसका खास उदाहरण है। यह युद्धपोत बाद में भारतीय नौसेना में आईएनएस दिल्ली के नाम से शामिल हुआ था और आज भी दोनों नौसेनाओं के साझा इतिहास की एक कड़ी माना जाता है।
- दौरे की शुरुआत: एडमिरल स्वामीनाथन ने 9 सितंबर को ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड का दौरा शुरू किया था।
- पहला पड़ाव: ऑस्ट्रेलिया, जहां नौसैनिक सहयोग मजबूत करने पर बातचीत हुई।
- अगला कदम: 2027 में दोनों देशों के बीच पहला द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास प्रस्तावित।
भारतीय नौसेना के अनुसार यह दौरा दोनों देशों के लंबे समय से चले आ रहे समुद्री संबंधों को और मजबूत करता है। यह सहयोग भारत सरकार के महासागर दृष्टिकोण के तहत भी आता है, जिसका अर्थ क्षेत्र में सुरक्षा और विकास को साथ लेकर आगे बढ़ना है।
