आज ऋषि पंचमी: सप्तऋषियों और देवी अरुंधती की पूजा का पर्व, जानें शुभ मुहूर्त और विधि

नई दिल्ली: आज ऋषि पंचमी है। सनातन परंपरा में भाद्रपद शुक्ल पंचमी को ऋषि पंचमी के नाम से जाना जाता है। यह पर्व हरतालिका तीज के दो दिन बाद और गणेश चतुर्थी के अगले दिन मनाया जाता है। इस दिन सप्तऋषियों और देवी अरुंधती की पूजा करने की परंपरा है। वर्ष 2026 में ऋषि पंचमी का व्रत आज, मंगलवार 15 सितंबर को रखा जा रहा है।
पंचांग के अनुसार पंचमी तिथि का आरंभ आज सुबह 7:45 बजे हुआ। चूंकि यह तिथि मध्याह्न के समय विद्यमान रहेगी, इसलिए इसी दिन व्रत और पूजन किया जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह व्रत आत्मशुद्धि और जाने-अनजाने हुए दोषों के प्रायश्चित से जुड़ा हुआ माना जाता है।
पूजा के शुभ मुहूर्त
- लाभ चौघड़िया: सुबह 10:44 बजे से दोपहर 12:16 बजे तक।
- अमृत चौघड़िया: दोपहर 12:16 बजे से 1:49 बजे तक।
- शुभ चौघड़िया: दोपहर 3:21 बजे से शाम 6:54 बजे तक।
ऐसे की जाती है पूजा
ऋषि पंचमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने और साफ कपड़े पहनकर व्रत का संकल्प लेने की परंपरा है। इसके बाद घर के पूजा स्थल को स्वच्छ करके वहां हल्दी या रोली से पूजा के लिए मंडल बनाया जाता है। फिर कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और वशिष्ठ इन सात ऋषियों के साथ देवी अरुंधती की स्थापना की जाती है।
स्थापना के बाद उन्हें गंध, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करके श्रद्धापूर्वक पूजा की जाती है। इस व्रत में आहार को लेकर भी विशेष नियम बताए गए हैं। धार्मिक परंपरा के अनुसार इस दिन हल से जोती गई भूमि में उगने वाले अनाज का सेवन नहीं किया जाता। इसके स्थान पर बिना जोती भूमि से प्राप्त समां के चावल और शाकाहारी आहार ग्रहण करने की परंपरा है।
पर्व का धार्मिक महत्व
ऋषि पंचमी को सप्तऋषियों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर माना जाता है। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक व्रत रखने, सप्तऋषियों की पूजा करने और कथा सुनने से मन की शुद्धि होती है। साथ ही परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और संतान के कल्याण की कामना पूरी होने की मान्यता है। इस दिन विशेष रूप से महिलाएं विधि-विधान से पूजा कर आत्मशुद्धि, सौभाग्य और परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना करती हैं।
यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, पंचांग और धार्मिक ग्रंथों पर आधारित है।
