राष्ट्रीय इंजीनियर दिवस: सपनों को हकीकत में बदलने वाले इंजीनियरों को नमन

नई दिल्ली: देश आज राष्ट्रीय इंजीनियर दिवस मना रहा है। यह दिन महान अभियंता सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती के रूप में मनाया जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए देश के इंजीनियरों को शुभकामनाएं दीं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इंजीनियर केवल मशीनें नहीं बनाते, वे कर्मयोगी हैं जो सपनों को हकीकत में बदलते हैं। उन्होंने कहा कि देश के विकास की नींव रखने में इंजीनियरों की भूमिका निर्णायक रही है, चाहे वह बांध हो, सड़क हो, पुल हो या आधुनिक तकनीक।
आधुनिक मैसूर के निर्माता
सर एम विश्वेश्वरैया का जन्म 15 सितंबर 1861 को हुआ था। उन्हें आधुनिक मैसूर का निर्माता कहा जाता है। सिंचाई, जल प्रबंधन और शहरी नियोजन के क्षेत्र में उनके काम को आज भी मिसाल माना जाता है। कृष्णराज सागर बांध के निर्माण और बाढ़ से बचाव की प्रणालियों के विकास में उनकी केंद्रीय भूमिका रही।
देश के प्रति उनके योगदान को देखते हुए वर्ष 1955 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया। भारत सरकार ने वर्ष 1968 में 15 सितंबर को राष्ट्रीय इंजीनियर दिवस घोषित किया, ताकि हर साल इस दिन देश के इंजीनियरों के योगदान को याद किया जा सके।
- जन्म: 15 सितंबर 1861।
- सम्मान: वर्ष 1955 में भारत रत्न।
- प्रमुख काम: कृष्णराज सागर बांध और बाढ़ से बचाव की प्रणालियां।
- घोषणा: वर्ष 1968 में 15 सितंबर को राष्ट्रीय इंजीनियर दिवस घोषित किया गया।
आज की चुनौतियां, वही सोच
विश्वेश्वरैया जिस दौर में काम कर रहे थे, उसमें संसाधन सीमित थे और तकनीक आज जैसी उन्नत नहीं थी। इसके बावजूद उन्होंने जल प्रबंधन की ऐसी व्यवस्थाएं तैयार कीं, जो दशकों बाद भी काम कर रही हैं। उनके काम की सबसे बड़ी खासियत यह मानी जाती है कि उन्होंने हर परियोजना को आम लोगों की जरूरत से जोड़कर देखा।
आज देश के इंजीनियर नवीकरणीय ऊर्जा, अंतरिक्ष कार्यक्रम, रेल नेटवर्क और डिजिटल ढांचे जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। इंजीनियर दिवस पर विभिन्न तकनीकी संस्थानों और इंजीनियरिंग कॉलेजों में कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें छात्रों को नवाचार और समस्या समाधान के लिए प्रेरित किया जाता है।
