हिंदी दिवस पर संदेश: भाषाई विविधता कमजोरी नहीं, भारत की सबसे बड़ी ताकत, मातृभाषा कभी न छोड़ें

नई दिल्ली: हिंदी दिवस के अवसर पर गृह मंत्री अमित शाह ने देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भाषाई विविधता भारत की कमजोरी नहीं, बल्कि इसकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि हर भाषा अपने भीतर इतिहास, लोक परंपराएं और दुनिया को देखने का एक अलग नजरिया समेटे होती है, और ये सब मिलकर नई पीढ़ी के संस्कार गढ़ते हैं।
उन्होंने कहा कि यही विविधता अनेकता में एकता को मजबूत करती है। भारत में सैकड़ों भाषाएं और बोलियां बोली जाती हैं और यही बहुलता देश की सांस्कृतिक पूंजी है।
हिंदी किसी भाषा की प्रतिस्पर्धी नहीं
गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि हिंदी अन्य भारतीय भाषाओं की प्रतिस्पर्धी नहीं है, बल्कि वह एक कड़ी है जो भारत की भाषाओं के बीच सार्थक संवाद को बढ़ावा देती है और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करती है। उन्होंने कहा कि भारत का इतिहास इस बात का प्रमाण है कि अलग-अलग मातृभाषाओं वाले लोगों ने मिलकर हिंदी को व्यापक संवाद की भाषा बनाया।
अपना उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि उनकी मातृभाषा गुजराती है, फिर भी हिंदी के माध्यम से वे देश के किसी भी हिस्से में आम लोगों से सीधे जुड़ पाते हैं।
युवाओं और अभिभावकों से अपील
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे दुनिया की जितनी भाषाएं सीख सकें, जरूर सीखें, लेकिन अपनी मातृभाषा को कभी न छोड़ें। अभिभावकों से उन्होंने कहा कि वे बच्चों से उनकी मातृभाषा में बात करें।
गृह मंत्री ने कहा कि किसी को अपनी भाषा बोलने में हीनता महसूस नहीं होनी चाहिए, क्योंकि भाषा ही हमें अपनी मां, अपनी मिट्टी, अपने इतिहास और अपनी संस्कृति से जोड़ती है।
14 सितंबर 1949 का वह फैसला
हिंदी दिवस का संबंध 14 सितंबर 1949 से है, जब संविधान सभा ने हिंदी को संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था। इसी ऐतिहासिक निर्णय की स्मृति में हर वर्ष यह दिवस मनाया जाता है।
अपने संदेश में उन्होंने भाषा के सवाल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति की अपील से भी जोड़ा और राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ किए जाने तथा नए कानूनों के नामकरण का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाओं का सम्मान संस्कृति, इतिहास और आत्मगौरव से जुड़ा विषय है।
