NGT की बड़ी पहल: दिल्ली में जुटेगा 15 देशों के जजों का महाकुंभ, 19 सितंबर से पर्यावरण पर मंथन

खबर की बड़ी बातें (Highlights):
- तारीख और वेन्यू: 19 सितंबर से नई दिल्ली के विज्ञान भवन में होगा दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन.
- ग्लोबल भागीदारी: रूस, ब्राजील, ब्रिटेन और बांग्लादेश समेत 15 देशों के जज लेंगे हिस्सा.
- थीम: 'पर्यावरण और जलवायु गतिशीलता का भविष्य' पर होगा गहन विचार-विमर्श.
- सत्रों की कमान: सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश करेंगे सम्मेलन के सभी 4 तकनीकी सत्रों की अध्यक्षता.
नई दिल्ली:
पर्यावरण संरक्षण और जलवायु संकट की वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए भारत की राजधानी नई दिल्ली में दुनिया भर के शीर्ष कानूनी दिग्गजों का बड़ा जमावड़ा होने जा रहा है. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) 19 सितंबर से दो दिवसीय भव्य अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन करने जा रहा है. विज्ञान भवन में आयोजित होने वाले इस सम्मेलन में 15 देशों के प्रतिष्ठित न्यायाधीश और कानूनी विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे.
एनजीटी के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि यह सम्मेलन पर्यावरण और जलवायु न्याय के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर 'बेस्ट प्रैक्टिसेज' (सर्वोत्तम प्रथाओं) को साझा करने का एक ऐतिहासिक मंच बनेगा.
किन देशों के जज होंगे शामिल?
विज्ञान भवन में आयोजित होने वाले इस सम्मेलन में दुनिया के कई प्रमुख देशों की भागीदारी देखने को मिलेगी. इसमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
रूस (Russia)
ब्राजील (Brazil)
यूनाइटेड किंगडम / ब्रिटेन (UK)
अल्जीरिया (Algeria)
आर्मीनिया (Armenia)
बांग्लादेश (Bangladesh)
म्यांमार (Myanmar)
सुप्रीम कोर्ट के जज करेंगे अध्यक्षता, 4 सत्रों में बंटेगा कार्यक्रम
एनजीटी अधिकारी के मुताबिक, इस दो दिवसीय आयोजन के दौरान कुल चार विशेष तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे. इन सभी तकनीकी सत्रों की अध्यक्षता भारत के सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीशों द्वारा की जाएगी.
सत्रों के दौरान मुख्य रूप से जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण नियंत्रण और जैव विविधता को बचाने से जुड़ी जटिल कानूनी व प्रशासनिक चुनौतियों पर चर्चा होगी.
क्या है सम्मेलन का मुख्य एजेंडा?
'पर्यावरण और जलवायु गतिशीलता का भविष्य' थीम पर आयोजित इस सम्मेलन का मुख्य मकसद केवल औपचारिक चर्चा तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया भर में अपनाई जा रही कारगर तकनीकों और फैसलों का आदान-प्रदान करना है.
अधिकारी ने कहा, "यह न सिर्फ NGT के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है. पर्यावरण और जलवायु से जुड़ी समस्याएं पूरी दुनिया को प्रभावित कर रही हैं. ऐसे में यह सम्मेलन पर्यावरण के भविष्य को सुरक्षित करने के उपायों पर केंद्रित रहेगा."
जब उनसे पूछा गया कि क्या सम्मेलन के अंत में किसी संयुक्त घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षर होंगे, तो उन्होंने साफ किया कि मुख्य ध्यान घोषणा-पत्र के बजाय व्यवहारिक समाधानों और अच्छी प्रथाओं को साझा करने पर है.
'NGT के आदेशों का सख्ती से हो रहा पालन'
देश भर की एजेंसियों द्वारा एनजीटी के आदेशों के अनुपालन को लेकर पूछे गए सवाल पर शीर्ष अधिकारी ने संतुष्टि जताई. उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में नियामक संस्थाओं और सरकारी महकमों के बीच ट्रिब्यूनल के आदेशों का अनुपालन काफी बढ़ा है और निर्देशों का कड़ाई से पालन किया जा रहा है.
डिजिटल तकनीक से जनता तक पहुंच बढ़ा रहा NGT
एनजीटी अपनी पहुंच को आम लोगों तक अधिक सुलभ और पारदर्शी बनाने के लिए तकनीक का सहारा ले रहा है. अधिकारी ने बताया कि डिजिटल माध्यमों और वर्चुअल हियरिंग के जरिए ट्रिब्यूनल की सुनवाई तक देश के कोने-कोने से लोगों की पहुंच आसान हुई है. साथ ही, पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सभी महत्वपूर्ण आदेश और रिपोर्ट आधिकारिक वेबसाइट पर समयबद्ध तरीके से अपलोड किए जा रहे हैं.
