कश्मीर में फिर लौटा सिनेमा का स्वर्णिम दौर: श्रीनगर में वेदांग रैना-शरवरी की फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' का प्रीमियर, सितारों ने बांधा समां

श्रीनगर: घाटी में सिनेमा का जादू एक बार फिर जीवंत हो उठा है। जम्मू-कश्मीर के पहले इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (J&K International Film Festival) के दौरान श्रीनगर स्थित आईनॉक्स (INOX) मल्टीप्लेक्स में अभिनेता वेदांग रैना और अभिनेत्री शरवरी वाघ की फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' का भव्य प्रीमियर आयोजित किया गया। इस ऐतिहासिक मौके पर बॉलीवुड फिल्ममेकर इम्तियाज अली, अभिनेता-निर्माता संजय सूरी, मशहूर प्लेबैक सिंगर सुनिधि चौहान समेत कई दिग्गज कलाकारों ने शिरकत की और घाटी में सिनेमा व स्थानीय प्रतिभाओं के भविष्य पर खुलकर बात की।
कश्मीर से गहरा नाता रखने वाले अभिनेता-निर्माता संजय सूरी ने इस आयोजन पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि लंबे अंतराल के बाद घाटी में फिल्मों को लेकर ऐसा उत्साह देखना भावुक कर देने वाला है।
सूरी ने कहा, "करीब 25-30 साल बाद घाटी में ऐसा माहौल फिर से देखना बहुत खास है। फिल्म निर्माता अब कश्मीर को महज एक शूटिंग लोकेशन के रूप में नहीं, बल्कि ऐसी जगह के तौर पर देख रहे हैं जहां की असली कहानियां दुनिया के सामने लाई जा सकती हैं। सिनेमा दूसरी दुनिया की एक खिड़की है। अगर फिल्म निर्माता यहां की कहानियों को असलियत के साथ दिखाना चाहते हैं, तो उन्हें यहां के लोगों से जुड़ना होगा। यदि कश्मीर में युवाओं के लिए फिल्म वर्कशॉप्स आयोजित हों और एक फिल्म स्कूल खुले, तो यह यहां की नई पीढ़ी के लिए मील का पत्थर साबित होगा।"
बॉलीवुड की मशहूर पार्श्व गायिका सुनिधि चौहान के लिए यह यात्रा बेहद भावुक रही। उन्होंने फिल्म 'मिशन कश्मीर' के सदाबहार गीत 'बुमरो बुमरो' को याद करते हुए मंच पर इसकी कुछ पंक्तियां भी गुनगुनाईं, जिससे पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
सुनिधि ने कहा, "मैंने हमेशा कश्मीर आने का सपना देखा था और इतने सालों बाद मेरा यह सपना पूरा हुआ। यहां आकर इस जगह की सांस्कृतिक और भावनात्मक ताकत का अहसास होता है। 'बुमरो बुमरो' गाना मेरे लिए हमेशा खास रहा है। कश्मीर में जितना प्यार और सम्मान मुझे मिला है, वैसा अनुभव बहुत कम जगह मिलता है। मेरी दिली इच्छा है कि मैं जल्द ही घाटी में एक बड़ा लाइव कॉन्सर्ट करूं।"
फिल्म के मुख्य अभिनेता वेदांग रैना के लिए यह प्रीमियर निजी तौर पर बेहद भावुक पल था। उन्होंने अपनी जड़ों को याद करते हुए कहा, "मेरा परिवार श्रीनगर के रैनावाड़ी से ताल्लुक रखता है। कश्मीर हमेशा मेरा घर रहेगा। भले ही मुझे पूरी कश्मीरी बोलनी नहीं आती, लेकिन मैं इसे समझ लेता हूं। अपने पुरखों की जमीन पर अपनी फिल्म का प्रीमियर देखना मेरे लिए गर्व की बात है।"
वहीं, अभिनेत्री शरवरी वाघ ने कहा कि अच्छी कहानियां किसी भाषा या भौगोलिक सीमाओं की मोहताज नहीं होतीं। सिनेमा कलाकारों को मंच देता है और कश्मीर की यह नई शुरुआत स्थानीय कलाकारों के लिए अवसरों के नए द्वार खोलेगी।
श्रीनगर में इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल का आयोजन और 'मैं वापस आऊंगा' के प्रीमियर ने यह साबित कर दिया है कि कश्मीर अब सांस्कृतिक और सिनेमाई पुनर्जागरण के दौर में प्रवेश कर चुका है। लंबे समय बाद घाटी में इस तरह के बड़े आयोजनों से स्थानीय कलाकारों, तकनीशियनों और पर्यटन उद्योग को नई दिशा और रफ्तार मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
