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चेक बाउंस केस: राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट से सशर्त राहत, जेल जाने से बचने के लिए जमा करने होंगे 5 करोड़ रुपये

9 September 2026
चेक बाउंस केस: राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट से सशर्त राहत, जेल जाने से बचने के लिए जमा करने होंगे 5 करोड़ रुपये

नई दिल्ली: चेक बाउंस से जुड़े 7 आपराधिक मामलों में बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी लेकिन सशर्त अंतरिम राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने अभिनेता को फिलहाल जेल में सरेंडर करने से छूट दे दी है, लेकिन इसके लिए एक सख्त शर्त रखी गई है। अदालत ने निर्देश दिया है कि यदि राजपाल यादव बुधवार तक सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में 5 करोड़ रुपये जमा करवाते हैं, तभी उन्हें सरेंडर से छूट मिलेगी।

मामले की अगली सुनवाई अब 15 सितंबर 2026 को तय की गई है।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने मंगलवार को राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा राजपाल यादव की विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।

अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा:

"यदि याचिकाकर्ता बुधवार तक अदालत की रजिस्ट्री में 5 करोड़ रुपये जमा करवा देते हैं, तो उन्हें सरेंडर करने से अंतरिम छूट प्रदान की जाती है।"

गौरतलब है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने बीती 10 जुलाई को राजपाल यादव की सजा को बरकरार रखा था। हाईकोर्ट ने 7 अलग-अलग चेक बाउंस मामलों में अभिनेता को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक मामले में 3-3 महीने की साधारण कारावास की सजा सुनाई थी (सभी सजाएं एक साथ चलनी थीं)।

इसके साथ ही हाईकोर्ट ने:

राजपाल यादव को प्रत्येक मामले में शिकायतकर्ता को 1.05 करोड़ रुपये देने का आदेश दिया था।

उनकी पत्नी राधा यादव को भी हर मामले में 5 लाख 51 हजार रुपये का जुर्माना भरने का निर्देश दिया था।

अभिनेता को सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के लिए 2 महीने की मोहलत दी गई थी और 10 सितंबर 2026 तक सरेंडर करने की समय-सीमा तय की गई थी। मियाद खत्म होने से ठीक पहले अभिनेता ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया।

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद साल 2010 का है, जब राजपाल यादव ने बतौर निर्देशक अपनी फिल्म 'अता-पता लापता' बनाने के लिए 'मैसर्स मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड' से 5 करोड़ रुपये का कर्ज/फाइनेंस लिया था।

2012 में फ्लॉप हुई फिल्म: साल 2012 में रिलीज हुई यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप हो गई, जिससे अभिनेता को भारी आर्थिक नुकसान हुआ।

9 करोड़ तक पहुंचा कर्ज: ब्याज जुड़ने के बाद यह रकम बढ़कर करीब 9 करोड़ रुपये हो गई।

बाउंस हुए चेक: बकाये के एवज में जारी किए गए चेक बैंक में बाउंस हो गए, जिसके बाद फाइनेंस कंपनी ने नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत अभिनेता, उनकी पत्नी और प्रोडक्शन कंपनी के खिलाफ कानूनी मुकदमा दर्ज कराया था।

सुप्रीम कोर्ट के इस अंतरिम निर्देश के बाद अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या अभिनेता तय समय सीमा के भीतर 5 करोड़ रुपये जमा करा पाते हैं या नहीं। रकम जमा न होने की स्थिति में उन्हें जेल में सरेंडर करना पड़ सकता है।