Sawalkote Hydroelectric Project: जम्मू-कश्मीर के सबसे बड़े प्रोजेक्ट के टेंडर में शामिल हुआ अदाणी ग्रुप, जानें 5 बड़ी बातें

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में ऊर्जा क्रांति और सामरिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक कदम बढ़ाया है। चिनाब नदी पर प्रस्तावित केंद्र शासित प्रदेश की अब तक की सबसे विशाल 1,850 मेगावाट (MW) क्षमता वाली सावलकोट जलविद्युत परियोजना (Sawalkote Hydroelectric Project) के निर्माण की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। परियोजना के पहले बड़े पैकेज (लॉट-1) के लिए सरकारी कंपनी नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन (NHPC) ने तकनीकी बोलियां (Technical Bids) खोल दी हैं।
करीब ₹5,129 करोड़ की अनुमानित लागत वाले इस पहले चरण के निर्माण की होड़ में देश का दिग्गज अदाणी ग्रुप (Adani Infrastructure) और लार्सन एंड टुब्रो (L&T) सहित 5 प्रमुख बुनियादी ढांचा कंपनियां ताल ठोक रही हैं।
टेंडर की रेस में देश के ये 5 बड़े कॉर्पोरेट घराने
NHPC द्वारा सिविल और हाइड्रो-मैकेनिकल कार्यों के लिए जारी किए गए इस टेंडर में देश की सबसे अनुभवी कंपनियों ने बोली लगाई है:
- अदाणी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (Adani Infrastructure Ltd)
- लार्सन एंड टुब्रो लिमिटेड (Larsen & Toubro Ltd)
- हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड (HCC Ltd)
- पटेल इंजीनियरिंग लिमिटेड (Patel Engineering Ltd)
- ऋत्विक प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड (Ritwik Projects Pvt Ltd)
NHPC ने इस अति-संवेदनशील और विशाल परियोजना के लिए बेहद कड़े वित्तीय मापदंड तय किए थे। टेंडर की शर्तों के मुताबिक, बोली लगाने वाली कंपनी का पिछले दो वित्तीय वर्षों में औसत वार्षिक टर्नओवर कम से कम ₹600 करोड़ और न्यूनतम कामकाजी पूंजी (Working Capital) ₹95 करोड़ होना अनिवार्य किया गया था।
9 साल में पूरा होगा पहला चरण: जानिए क्या होगा काम?
परियोजना की विशालता और भारी-भरकम लागत को देखते हुए इसे कई चरणों में बांटा गया है।
- पहला चरण (लॉट-1): इसके तहत चिनाब नदी के पानी के बहाव को मोड़ने वाली डायवर्जन टनल (Diversion Tunnels), सुरक्षात्मक कॉफर बांध (Coffer Dams), मुख्य पहुंच सड़कें और सहायक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। इस काम को पूरा करने के लिए 9 साल की समय-सीमा तय की गई है।
- विशाल दायरा: पूरा प्रोजेक्ट लगभग 1,401.35 हेक्टेयर भूमि पर फैला होगा, जिसमें 840 हेक्टेयर से अधिक वन भूमि शामिल है।
- तीन जिलों में विस्तार: यह विशाल जलविद्युत परियोजना जम्मू-कश्मीर के तीन पर्वतीय जिलों—रामबन, रियासी और उधमपुर के भूभाग में फैली होगी।
कुल लागत: इस पूरे महाप्रोजेक्ट के निर्माण में ₹31,000 करोड़ से अधिक का खर्च आने का अनुमान है।
सावलकोट परियोजना पिछले चार दशकों (लगभग 40 साल) से प्रशासनिक लेटलतीफी, पर्यावरणीय मंजूरियों और चिनाब नदी पर बांध निर्माण को लेकर पाकिस्तान की लगातार आपत्तियों के कारण ठंडे बस्ते में पड़ी हुई थी।
रणनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इस गतिरोध में वास्तविक मोड़ भारत सरकार द्वारा सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर अपनाए गए कड़े और आक्रामक रुख के बाद आया। भारत ने चिनाब नदी पर अपने जल अधिकारों का पूर्ण इस्तेमाल करने की रणनीति के तहत इस परियोजना को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।
सावलकोट प्रोजेक्ट के प्रमुख सतनाम सिंह के अनुसार, तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन के बाद सफल कंपनी को लेटर ऑफ अवार्ड (LoA) जारी किया जाएगा। परियोजना को अब केवल पब्लिक इन्वेस्टमेंट बोर्ड (PIB) और केंद्रीय कैबिनेट (CCEA) से औपचारिक अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है। मंजूरी मिलते ही चिनाब घाटी में जमीनी निर्माण कार्य युद्धस्तर पर शुरू कर दिया जाएगा।
यह परियोजना न केवल जम्मू-कश्मीर को बिजली उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाएगी, बल्कि उत्तर भारत के राज्यों को स्वच्छ पनबिजली (Green Hydro Power) मुहैया कराने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार भी पैदा करेगी।
