Wayanad Coffee: सूखे की मार झेल रहे किसानों के लिए 'संजीवनी', 2,500 करोड़ का मेगा प्लान; 70% तक मिलेगी सब्सिडी

केरल के वायनाड में कॉफी उद्योग को फिर से जिंदा करने के लिए कॉफी बोर्ड और राज्य सरकार ने 10 साल का बड़ा रोडमैप तैयार किया है. जानिए किसानों को इससे क्या-क्या फायदे होंगे.
वायनाड (केरल):
केरल के वायनाड में संकट से जूझ रहे कॉफी किसानों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है. हाल ही में 'अल नीनो' (El Niño) के असर और भीषण सूखे से बर्बाद हुई फसलों के नुकसान से उबारने के लिए कॉफी बोर्ड ने एक बड़ा कदम उठाया है. स्थानीय कॉफी बागानों को आधुनिक बनाने और उनमें नई जान फूंकने के लिए 2,500 करोड़ रुपये का एक महत्वाकांक्षी 10-वर्षीय मास्टर प्लान पेश किया गया है.
इस परियोजना का मकसद न केवल वायनाड के कॉफी उत्पादन को दोगुना करना है, बल्कि जलवायु परिवर्तन के दौर में इस पर निर्भर 75,000 से अधिक किसान परिवारों की आजीविका को भी सुरक्षित करना है.
प्लान की मुख्य बातें (Key Highlights):
- 2,500 करोड़ का मास्टर प्लान: अगले 10 सालों में चरणबद्ध तरीके से लागू होगा आधुनिकीकरण प्रोजेक्ट.
- 70% तक की भारी सब्सिडी: पुराने पौधे बदलने और नया इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने के लिए कॉफी बोर्ड और सरकार मिलकर 70% सब्सिडी देंगे.
- उत्पादन दोगुना करने का लक्ष्य: अगले 5 से 6 सालों में वायनाड में सालाना उत्पादन बढ़ाकर 1,20,000 मीट्रिक टन करने की तैयारी.
- रीप्लांटेशन ड्राइव: दशकों पुराने और कम पैदावार वाले पौधों की जगह जलवायु-अनुकूल उच्च पैदावार वाली किस्में लगाई जाएंगी.
- आधुनिक तकनीक: सूखे से निपटने के लिए ड्रिप इरिगेशन (टपक सिंचाई), स्प्रिंकलर और वाटर-हार्वेस्टिंग तालाबों का निर्माण होगा.
पुराने पौधे हटेंगे, खेतों में लगेंगी आधुनिक किस्में
मास्टर प्लान के तहत सबसे बड़ा फोकस दशकों पुराने उन पौधों को हटाने पर है, जिनकी उत्पादकता बेहद कम हो चुकी है.
- केरल भर में लगभग 53,000 हेक्टेयर में फैले पुराने बागानों को हर साल 6,000 हेक्टेयर की दर से बदला जाएगा.
- छोटे किसानों पर इसका आर्थिक बोझ न पड़े, इसके लिए 70 फीसदी तक की वित्तीय मदद (सब्सिडी) दी जाएगी.
- इसके अलावा तालाब खोदने, सुखाने के लिए यार्ड (Drying Yard) बनाने और पहली बार कॉफी की खेती शुरू करने वाले नए किसानों को भी इस योजना के दायरे में लाया जा रहा है.
विश्व बैंक और नाबार्ड भी देंगे साथ
कॉफी बोर्ड के संयुक्त निदेशक डॉ. एम. करुथा मणि के अनुसार, "अब कॉफी विकास कार्यक्रम अकेले नहीं, बल्कि कृषि विभाग के साथ मिलकर चलाए जाएंगे. कॉफी बोर्ड की योजनाओं के साथ-साथ विश्व बैंक द्वारा वित्तपोषित KERA प्रोजेक्ट और NABARD की मदद से इसे जमीन पर उतारा जाएगा." कृषि मंत्री को इस संबंध में 2,050 करोड़ रुपये की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) भी सौंपी जा चुकी है.
ग्लोबल मार्केट में 'वायनाड रोबस्टा' का डंका
कच्चे तेल के बाद कॉफी दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक उत्पाद है.
- दुनिया के 135 कॉफी उत्पादक देशों में भारत उत्पादन में 5वें और निर्यात में 7वें स्थान पर है.
- वित्त वर्ष 2025-26 में भारतीय कॉफी निर्यात से देश को करीब 16,600 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा प्राप्त हुई.
- ब्राजील जैसे बड़े उत्पादक देशों में मौसम की मार से उत्पादन गिरा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय कॉफी, विशेषकर 'वायनाड रोबस्टा' की मांग और कीमतें काफी बढ़ गई हैं.
- वायनाड रोबस्टा के रोजाना के दाम सीधे लंदन मार्केट से तय होते हैं, जबकि अरेबिका कॉफी न्यूयॉर्क मार्केट से जुड़ी है. इटली के रोस्टिंग उद्योग में भी वायनाड की कॉफी की भारी मांग है.
इंटरनेशनल कॉफी डे पर होगा मंथन
केरल सरकार और कॉफी बोर्ड इस बार 1 अक्टूबर को 'अंतरराष्ट्रीय कॉफी दिवस' बड़े पैमाने पर मनाने की तैयारी में हैं.
- 29 सितंबर: मनंतवाडी
- 30 सितंबर: सुल्तान बाथेरी
- 1 अक्टूबर: कलपेट्टा
इन आयोजनों में अगले एक दशक की रणनीतियों पर अंतिम मुहर लगेगी, जिससे किसान, मजदूर, निर्यातक और व्यापारी सभी एक मंच पर आकर वायनाड की कॉफी को दुनिया के नक्शे पर नई पहचान दिला सकें.
