यूएस ओपन में ज्वेरेव का जलवा: बेन शेल्टन को हराकर जीता दूसरा ग्रैंड स्लैम, भावुक होकर बोले- मां सबसे मजबूत महिला

न्यूयॉर्क: जर्मनी के अलेक्जेंडर ज्वेरेव ने यूएस ओपन का खिताब जीत लिया है। आर्थर ऐश स्टेडियम में खेले गए पुरुष एकल फाइनल में 29 वर्षीय ज्वेरेव ने अमेरिका के 23 वर्षीय बेन शेल्टन को 6-3, 7-6 (7-2), 5-7, 6-2 से हराया। यह उनके करियर का दूसरा ग्रैंड स्लैम खिताब है और वे बोरिस बेकर के बाद यूएस ओपन जीतने वाले पहले जर्मन पुरुष खिलाड़ी बने हैं।
फाइनल एकतरफा नहीं रहा। शुरुआती दो सेट गंवाने के बाद शेल्टन ने जोरदार वापसी करते हुए तीसरा सेट 7-5 से अपने नाम किया और मुकाबले को रोमांचक मोड़ पर ला दिया। लेकिन चौथे सेट में ज्वेरेव ने फिर लय हासिल की और 6-2 से सेट जीतकर खिताब पर कब्जा कर लिया।
खिताबी सफर में मिलीं कड़ी चुनौतियां
ज्वेरेव ने सेमीफाइनल में रूस के कैरेन खाचानोव को 6-3, 7-6 (9-7), 7-6 (8-6) से हराया था, जहां दो सेट टाईब्रेकर तक खिंचे। क्वार्टर फाइनल में उन्होंने नीदरलैंड्स के बोटिक वान डे जांडशुल्प को मात दी थी। दूसरी ओर शेल्टन ने सेमीफाइनल में अपने ही देश के फ्रांसेस टियाफो को हराकर फाइनल में जगह बनाई थी।
चार साल की उम्र से शुरू हुई लड़ाई
खिताब जीतने के बाद ज्वेरेव भावुक हो गए। उन्होंने बताया कि चार साल की उम्र में उन्हें एक ऐसी स्थिति का पता चला था, जिसके चलते टेनिस खेलना लगभग असंभव माना जा रहा था। उन्होंने कहा कि उनके माता-पिता हर कदम पर उनके साथ खड़े रहे और यही वजह है कि वे इस मुकाम तक पहुंच सके।
अपनी मां का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वे उन्हें सबसे मजबूत महिला मानते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनका बेटा आगे चलकर अपना खेल खुद चुन सकता है और उस पर टेनिस थोपा नहीं जाएगा।
धन्यवाद देने की शुरुआत उन्होंने अपने ड्राइवर से की, जिन्होंने पूरे टूर्नामेंट के दौरान उन्हें प्रतियोगिता स्थल तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि बड़े मंच की सफलता के पीछे पर्दे के पीछे काम करने वाले लोगों की भूमिका अक्सर अनदेखी रह जाती है।
प्रतिद्वंद्वी के लिए कही बड़ी बात
नेट के पार खड़े प्रतिद्वंद्वी को लेकर ज्वेरेव का बयान सुर्खियों में रहा। उन्होंने शेल्टन से कहा कि वे अपनी पूरी इनामी राशि इस बात पर दांव पर लगाने को तैयार हैं कि शेल्टन एक दिन यूएस ओपन चैंपियन जरूर बनेंगे।
पहली बार किसी ग्रैंड स्लैम के फाइनल में पहुंचे शेल्टन ने भी पूरे टूर्नामेंट में प्रभावित किया। खिताब भले हाथ से निकल गया, लेकिन घरेलू दर्शकों के सामने खेले गए इस फाइनल ने उन्हें बड़े मंच का अनुभव दिया, जो आगे के सत्र में काम आएगा।
