सोलह साल का इंतजार खत्म: धीरज बोम्मदेवरा तीरंदाजी विश्व कप फाइनल में स्वर्ण जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष रिकर्व तीरंदाज बने

साल्टिलो: भारतीय तीरंदाजी के लिए रविवार का दिन ऐतिहासिक रहा। धीरज बोम्मदेवरा मेक्सिको के साल्टिलो में खेले गए तीरंदाजी विश्व कप फाइनल में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष रिकर्व तीरंदाज बन गए। खिताबी मुकाबले में उन्होंने जापान के नाकानिशी जुन्या को शूट ऑफ में हराया।
इस जीत के साथ भारतीय पुरुष रिकर्व वर्ग का सोलह साल लंबा इंतजार भी खत्म हुआ। इससे पहले इस स्पर्धा में भारतीय पुरुष तीरंदाज का आखिरी पदक 2010 में एडिनबर्ग में जयंत तालुकदार ने कांस्य के रूप में जीता था।
पांच सेट और फिर शूट ऑफ
विश्व रैंकिंग में दसवें स्थान पर मौजूद 25 वर्षीय धीरज ने फाइनल में विश्व के 20वें नंबर के खिलाड़ी नाकानिशी को 6-5 से हराया। मुकाबला बेहद कड़ा रहा और पांचों सेट में दोनों खिलाड़ियों के बीच अंतर एक-दो अंक का ही रहा।
- सेट दर सेट: पहला सेट 28-28 से बराबर, दूसरा 28-29 से नाकानिशी के नाम, तीसरा 29-28 से धीरज के नाम, चौथा 28-30 से नाकानिशी के नाम और पांचवां 28-27 से धीरज के नाम रहा।
- निर्णायक तीर: स्कोर 5-5 से बराबर होने पर मुकाबला शूट ऑफ में पहुंचा, जहां धीरज ने 10 अंक का तीर लगाकर 9 अंक वाले प्रतिद्वंद्वी को पीछे छोड़ दिया।
दो बार खाली हाथ लौटे, तीसरी बार नहीं चूके
सेना से जुड़े धीरज के लिए यह सफलता आसान नहीं रही। वे 2023 और 2024 में भी विश्व कप फाइनल में पहुंचे थे, लेकिन दोनों बार खाली हाथ लौटे। तीसरे प्रयास में उन्होंने न सिर्फ पदक जीता, बल्कि सीधे शीर्ष स्थान हासिल किया।
धीरज की इस सुनहरी सफलता के पीछे वर्षों की कड़ी मेहनत के साथ परिवार का साथ भी रहा। तैयारी के कठिन दौर में उनकी मां ने घर के संसाधन जुटाने में जो भूमिका निभाई, उसका जिक्र उनकी उपलब्धि के साथ लगातार होता रहा है।
भारतीय तीरंदाजी के रिकॉर्ड में कहां ठहरती है यह जीत
विश्व कप फाइनल में स्वर्ण जीतने वाली अब तक इकलौती भारतीय तीरंदाज डोला बनर्जी रही हैं, जिन्होंने 2007 में दुबई में महिला व्यक्तिगत वर्ग का खिताब जीता था। भारतीय तीरंदाजों में सबसे ज्यादा विश्व कप फाइनल पदक दीपिका के नाम हैं, जिन्होंने पांच रजत और एक कांस्य पदक हासिल किया है।
धीरज की यह जीत इसलिए भी अहम मानी जा रही है कि रिकर्व वर्ग ओलंपिक में खेला जाने वाला वर्ग है। विश्व कप फाइनल में दुनिया के चुनिंदा शीर्ष तीरंदाज ही हिस्सा लेते हैं, इसलिए इस मंच पर मिली सफलता आने वाली बड़ी प्रतियोगिताओं के लिहाज से भरोसा बढ़ाने वाली मानी जा रही है।
