पक्षी कभी 'स्टॉल' क्यों नहीं होते? इसी सवाल से निकली आईआईटी मद्रास की 'मॉर्फिंग स्किन', जो उड़ान के बीच बदल लेगी पंखों का आकार

चेन्नई: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास के शोधकर्ताओं ने विमानों के पंखों के लिए एक ऐसी लचीली परत विकसित की है, जो उड़ान के दौरान तुरंत अपना आकार बदलकर हवा के प्रवाह को पंख से जुड़ा रखती है। इसे 'मॉर्फिंग स्किन' नाम दिया गया है और इसकी प्रेरणा सीधे पक्षियों से ली गई है।
शोध की शुरुआत एक साधारण से सवाल से हुई थी कि आखिर पक्षी शायद ही कभी 'स्टॉल' क्यों होते हैं, जबकि विमानों के लिए यह एक गंभीर स्थिति मानी जाती है। स्टॉल तब होता है जब पंख के ऊपर से गुजरने वाली हवा का प्रवाह टूट जाता है और विमान का लिफ्ट यानी उठान अचानक गिर जाती है।
कैसे काम करती है यह तकनीक
इस प्रणाली में मैक्रो फाइबर कंपोजिट (एमएफसी) पट्टियों का इस्तेमाल किया गया है, जो वास्तविक समय में हवा के प्रवाह को भांपकर पंख की सतह में जरूरी बदलाव लागू कर देती हैं। इसके साथ पूर्वानुमान लगाने वाली कंप्यूटेशनल मॉडलिंग और विंड टनल में किए गए प्रयोगों को जोड़ा गया है।
परिणामों के मुताबिक यह परत प्रवाह के अलग होने को रोकती है, लिफ्ट बढ़ाती है और ड्रैग यानी घर्षण कम करती है। इसका सीधा असर उड़ान की सुरक्षा और ईंधन की खपत, दोनों पर पड़ता है। खराब मौसम, पक्षी टकराने या तकनीकी गड़बड़ी जैसी स्थितियों में भी विमान पर नियंत्रण बेहतर रहता है।
करीब 20 साल की मेहनत, पेटेंट भी हासिल
यह शोध अनुप्रयुक्त यांत्रिकी एवं जैव चिकित्सा अभियांत्रिकी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रिंकू मुखर्जी के नेतृत्व में हुआ। उनके पूर्व छात्र एंटनी सैमुअल बी ने संख्यात्मक कोड तैयार किया, जबकि पूर्व छात्र डॉ. अरित्रस रॉय ने विंड टनल में प्रयोग किए।
यह काम करीब 20 वर्षों की मेहनत का नतीजा है, जिसे प्रयोगात्मक रूप से सिद्ध किया जा चुका है और इसका पेटेंट भी लिया जा चुका है। शोध एल्सेवियर की पत्रिका 'यूरोपियन जर्नल ऑफ मैकेनिक्स – बी/फ्लूइड्स' में प्रकाशित हुआ है।
कहां-कहां हो सकता है इस्तेमाल
- वाणिज्यिक विमान: छोटे और व्यस्त रनवे पर सुरक्षित संचालन, कम ईंधन खपत और कम कार्बन उत्सर्जन।
- अगली पीढ़ी के विमान: नए डिजाइन में शुरू से ही अनुकूलनशील पंखों को शामिल किया जा सकता है।
- ड्रोन और यूएवी: तेज हवा या बदलती परिस्थितियों में बेहतर स्थिरता।
- छोटे विमान: भारी एक्चुएटर की जरूरत घटने से वजन और जटिलता दोनों कम।
- रक्षा क्षेत्र: उच्च प्रदर्शन वाले विमानों में तेज और सटीक नियंत्रण।
सबसे व्यावहारिक पहलू यह है कि इस तकनीक को मौजूदा पंखों में भी लगाया जा सकता है, यानी विमान के पूरे ढांचे को नए सिरे से डिजाइन किए बिना ही इसका लाभ लिया जा सकता है। शोधकर्ता अब इसे वास्तविक विमानों पर लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
