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प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की बड़ी तैयारी: चमोली के वसुधारा ताल में लगेगा अर्ली वार्निंग सिस्टम, खतरे से 1 घंटे पहले मिलेगा अलर्ट

13 September 2026
प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की बड़ी तैयारी: चमोली के वसुधारा ताल में लगेगा अर्ली वार्निंग सिस्टम, खतरे से 1 घंटे पहले मिलेगा अलर्ट

रुड़की: पड़ोसी देश नेपाल में हाल ही में आई भीषण प्राकृतिक आपदा से सबक लेते हुए उत्तराखंड सरकार और वैज्ञानिक संस्थान राज्य के संवेदनशील हिमालयी क्षेत्रों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क हो गए हैं। पहाड़ों में अचानक आने वाली बाढ़ (फ्लैश फ्लड), तेज जलप्रवाह और मौसमी बदलावों से होने वाली तबाही से निपटने के लिए चमोली जिले के अतिसंवेदनशील वसुधारा (वसुंधरा) ताल में अत्याधुनिक 'अर्ली वार्निंग सिस्टम' (पूर्व चेतावनी प्रणाली) स्थापित करने की तैयारी तेज कर दी गई है।

इस महत्वाकांक्षी परियोजना को सीएसआईआर-केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (CBRI), रुड़की द्वारा तैयार किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्लेशियर या ताल टूटने की स्थिति में निचले रिहायशी इलाकों को समय रहते सतर्क करना है।

आधुनिक सेंसर, कैमरे और रेन गेज से होगी 24 घंटे निगरानी

परियोजना के तहत वसुधारा ताल के आसपास अत्याधुनिक उपकरण लगाए जाएंगे। इनमें एडवांस सेंसर, हाई-टेक कैमरे और ऑटोमेटिक रेन गेज शामिल होंगे। यह सिस्टम रियल टाइम (तत्काल) डेटा बेस स्टेशन तक भेजेगा, जिससे निम्नलिखित मानकों पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखी जा सकेगी:

  • ताल का जलस्तर और पानी के बहाव की गति
  • बारिश और बर्फबारी की तीव्रता
  • तापमान और हवा की रफ्तार में बदलाव

खतरे से 1 घंटे पहले मिल जाएगी चेतावनी

सीबीआरआई के वैज्ञानिकों के अनुसार, अलग-अलग आपदा परिदृश्यों (Disaster Scenarios) का पहले से वैज्ञानिक अध्ययन और कंप्यूटर सिमुलेशन किया जाएगा। इसी अध्ययन के आधार पर ऐसी व्यवस्था बनाई जा रही है कि किसी भी आपात स्थिति या जलस्तर के अचानक बढ़ने पर निचले मैदानी और घाटी क्षेत्रों को करीब एक घंटे पहले चेतावनी मिल जाए।

एक घंटे का यह समय संवेदनशील इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने (इवैक्यूएशन) और जान-माल के भारी नुकसान को टालने के लिए बेहद अहम साबित होगा।

सरकार की मंजूरी मिलते ही ताल पहुंचेगी वैज्ञानिकों की टीम

सीएसआईआर-सीबीआरआई, रुड़की के निदेशक प्रदीप कुमार ने बताया कि उत्तराखंड सरकार के साथ समन्वय स्थापित कर परियोजना का विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर भेज दिया गया है। राज्य सरकार से औपचारिक मंजूरी मिलते ही विशेषज्ञों की टीम वसुधारा ताल पहुंचकर निगरानी स्टेशन की स्थापना का कार्य शुरू कर देगी। इस स्वदेशी तकनीक की विश्वसनीयता परखने के लिए इसे कम से कम एक पूरे मौसम चक्र (Weather Cycle) तक परीक्षण के दौर से गुजारा जाएगा।

CBRI परिसर में चल रहा परीक्षण, अन्य झीलों में भी होगा विस्तार

वर्तमान में इस पूरे सिस्टम की तकनीकी कार्यप्रणाली का ट्रायल सीबीआरआई रुड़की के परिसर में जारी है। वैज्ञानिकों का मानना है कि वसुधारा ताल में यह प्रयोग सफल रहने के बाद इस स्वदेशी तकनीक को उत्तराखंड की अन्य संवेदनशील हिमनद झीलों (Glacial Lakes) और अत्यधिक जोखिम वाले हिमालयी क्षेत्रों में भी लागू किया जाएगा। भविष्य में हिमालय में ग्लेशियर फटने या बादल फटने से होने वाली आपदाओं के प्रभाव को कम करने में यह तकनीक 'गेम-चेंजर' साबित हो सकती है।