Kajari Teej Puja Samagri List: कजरी तीज के व्रत में न छूटे कोई सामान, यहां देखें पूजन सामग्री की पूरी लिस्ट और धार्मिक महत्व

नई दिल्ली: भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को सुहागिन महिलाओं का पावन पर्व ‘कजरी तीज’ (कजली तीज) श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। यह पावन व्रत अखंड सौभाग्य, पति की दीर्घायु और सुखद दांपत्य जीवन की कामना के लिए रखा जाता है। वहीं, अविवाहित युवतियां भी मनचाहा वर और सुयोग्य जीवनसाथी पाने के लिए यह व्रत पूरे विधि-विधान से करती हैं।
धार्मिक मान्यता है कि पूजा के दौरान किसी भी आवश्यक सामग्री का छूटना पूजा में विघ्न का कारण बन सकता है। इसलिए व्रत से पहले ही पूजा सामग्री की पूरी तैयारी कर लेना शुभ माना जाता है। आइए जानते हैं कजरी तीज का महत्व और पूजन सामग्री की पूरी लिस्ट।
क्यों मनाई जाती है कजरी तीज?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कजरी तीज का सीधा संबंध भगवान शिव और माता पार्वती से है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए 108 जन्मों तक कठोर तपस्या की थी। उनकी इसी अटूट भक्ति और समर्पण के कारण कजरी तीज को दांपत्य सुख, प्रेम और समर्पण का प्रतीक माना गया है।
वर्षा ऋतु में आने वाला यह पर्व प्रकृति और लोक-संस्कृति से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। इस दिन महिलाएं निर्जला या फलाहार व्रत रखती हैं, पारंपरिक सोलह श्रृंगार करती हैं, झूला झूलती हैं और पारंपरिक कजरी लोकगीत गाकर खुशियां मनाती हैं।
कजरी तीज का धार्मिक महत्व
कजरी तीज पर भगवान शिव, माता पार्वती और प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश की विधिवत पूजा की जाती है। उत्तर भारत और विशेषकर राजस्थान व उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों में इस दिन नीमड़ी माता (नीम के वृक्ष) की पूजा करने की विशेष परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन पूरे विधि-विधान से व्रत कथा सुनने और पूजन करने से वैवाहिक जीवन के सभी संकट दूर होते हैं और परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है।
कजरी तीज पूजा सामग्री की संपूर्ण चेकलिस्ट (Puja Samagri List)
पूजा के समय किसी भी प्रकार की असुविधा से बचने के लिए इन सामग्रियों को पहले से ही एकत्रित कर लें:
1. पूजा एवं कलश स्थापना हेतु:
साफ पीतल या स्टील की पूजा थाली
जल कलश (आम/आम्रपल्लव और नारियल सहित)
भगवान शिव, माता पार्वती और श्री गणेश जी की प्रतिमा या चित्र
मिट्टी का शिवलिंग (यदि घर पर निर्माण करना हो)
शुद्ध जल एवं गंगाजल
केले के पत्ते (मंडप व पूजन वेदी के लिए)
कच्चा सूत (मौली) और जनेऊ
2. अभिषेक व अर्पण सामग्री:
पंचामृत: दूध, दही, घी, शहद और शक्कर
रोली, कुमकुम, हल्दी और शुद्ध चंदन
अक्षत (बिना टूटे हुए चावल)
धूप, अगरबत्ती, शुद्ध घी/तेल का दीपक और कपूर
पान के पत्ते और साबुत सुपारी
3. फूल एवं पत्तियां:
ताजे पुष्प व पुष्पमाला
बेलपत्र, दूर्वा (दूब घास), आक व धतूरे के फूल
4. भोग एवं नैवेद्य:
मौसमी फल (केला, अनार, अमरूद, सेब आदि)
मिष्ठान्न (खीर, मालपुआ, बेसन के लड्डू आदि)
सत्तू (चने या गेहूं के आटे का पारंपरिक सत्तू)
5. सुहाग (श्रृंगार) सामग्री:
लाल चुनरी, सिंदूर, महावर (आलता)
हरी/लाल चूड़ियां, बिंदी, काजल, मेहंदी, कंघी व दर्पण
6. अन्य सामग्री:
कजरी तीज व्रत कथा की पुस्तक
दक्षिणा (लाल या पीले कपड़े में बांधकर अर्पित करने हेतु)
झूला सजावट सामग्री (यदि पारंपरिक झूला लगाने की प्रथा हो)
सुझाव: कजरी तीज की शाम को चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर ही व्रत का पारण किया जाता है। अतः पूजा की थाली और अर्घ्य का लोटा पहले से तैयार रखें।
