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दवा लिखते ही पकड़ में आ जाएगी गलती: 28 लाख पर्चियों और 1700 डॉक्टरों के अध्ययन में एआई ने 8.6 फीसदी खतरनाक संयोजन रोके

13 September 2026
दवा लिखते ही पकड़ में आ जाएगी गलती: 28 लाख पर्चियों और 1700 डॉक्टरों के अध्ययन में एआई ने 8.6 फीसदी खतरनाक संयोजन रोके

स्वास्थ्य डेस्क: दवा की पर्ची पर लिखी एक छोटी सी चूक कई बार मरीज के लिए बड़ी मुसीबत बन जाती है, खासकर तब जब वह पहले से कई दूसरी दवाएं ले रहा हो। एक नए अध्ययन में सामने आया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से ऐसी गलतियां उसी वक्त पकड़ी जा सकती हैं, जब डॉक्टर पर्ची लिख रहा होता है।

इस अध्ययन में करीब 28 लाख दवा पर्चियों और लगभग 1700 डॉक्टरों के काम का विश्लेषण किया गया। नतीजों के मुताबिक एआई की मदद से चलने वाली डिजिटल प्रणाली ने चिकित्सकों को दवाओं के संभावित खतरनाक संयोजनों में से 8.6 फीसदी गलतियां पहचानने और सुधारने में मदद की।

बाद में नहीं, उसी समय मिलती है चेतावनी

इस प्रणाली की सबसे बड़ी खूबी यही है कि यह गलती होने के बाद रिपोर्ट नहीं बनाती, बल्कि पर्ची लिखते समय ही सक्रिय हो जाती है। यह मरीज की पहले से चल रही दवाओं की सूची को नई लिखी जा रही दवा के साथ मिलाकर देखती है और जोखिम दिखने पर तुरंत संकेत दे देती है।

इसके बाद डॉक्टर के पास तीन विकल्प रहते हैं, वह दवा बदल सकता है, उसे रोक सकता है या अपनी पूरी पर्ची पर दोबारा विचार कर सकता है। यानी अंतिम फैसला डॉक्टर का ही रहता है, प्रणाली सिर्फ चेतावनी देती है।

किन बीमारियों में सबसे ज्यादा खतरा

जिस तरह की गलतियों पर यह अध्ययन केंद्रित है, उन्हें ड्रग-ड्रग इंटरैक्शन कहा जाता है, यानी दो दवाओं का आपस में मिलकर नुकसानदेह असर पैदा करना। ऐसे मामले मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग जैसी स्थितियों में सबसे ज्यादा देखे जाते हैं, जहां मरीज लंबे समय तक एक साथ कई दवाएं लेता है।

अध्ययन में यह भी सामने आया कि जिन डॉक्टरों पर मरीजों का बोझ ज्यादा था, उन्हें इस प्रणाली से सबसे अधिक फायदा हुआ। व्यस्त ओपीडी में जहां एक-एक पर्ची पर कम समय मिलता है, वहीं ऐसी चेतावनियां सबसे ज्यादा काम आईं।

समय के साथ बदला डॉक्टरों का व्यवहार

शोधकर्ताओं ने एक दिलचस्प बदलाव भी दर्ज किया। शुरुआत में डॉक्टर चेतावनी मिलने पर दवा बदलकर या हटाकर प्रतिक्रिया देते थे। लेकिन समय बीतने के साथ उन्होंने उन पैटर्न को खुद ही समझ लिया और यह सीख लिया कि किन संयोजनों में पहले से सतर्क रहना चाहिए। यानी तकनीक ने सिर्फ गलती नहीं रोकी, बल्कि प्रशिक्षण का काम भी किया।

यह अध्ययन नानयांग बिजनेस स्कूल और नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी से जुड़े शोधकर्ताओं शियाओदान शाओ, विवेक चौधरी और अर्नब मजूमदार ने किया है।

ध्यान रहे कि यह जानकारी सामान्य समझ के लिए है। दवा से जुड़ा कोई भी बदलाव करने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर लें।