एशियाई खेलों में कुश्ती से बड़ी उम्मीद, अमन और अंतिम के साथ मैट पर उतरेगी भारत की नई पीढ़ी

नई दिल्ली: एशियाई खेलों में भारतीय कुश्ती के पास इस बार 64 साल पुराना इतिहास बदलने का मौका है। 1962 के बाद से कुश्ती में जो कसर रह गई थी, उसे पूरा करने के लिए युवा पहलवानों की एक नई पीढ़ी मैट पर उतरने को तैयार है।
भारतीय दल में ओलंपिक पदक विजेता से लेकर विश्व रैंकिंग में शीर्ष पर चल रहे पहलवान शामिल हैं। पिछले कुछ सीजन में इन खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है, जिससे पदक की उम्मीदें बढ़ी हैं।
इन पहलवानों पर रहेंगी निगाहें
- अमन सेहरावत, 57 किग्रा: ओलंपिक पदक विजेता अमन ने पिछले एशियाई खेलों में कांस्य जीता था और इस साल बुडापेस्ट रैंकिंग सीरीज में चैंपियन बने।
- अंतिम पंघाल, 53 किग्रा: दो बार की विश्व चैंपियनशिप पदक विजेता अंतिम ने पिछली बार कांस्य पदक जीता था और इस बार रंग बदलने के इरादे से उतरेंगी।
- सुजीत कलकल, 65 किग्रा: मौजूदा विश्व नंबर एक सुजीत लगातार 20 मुकाबलों में अजेय हैं और एशियाई खेलों में पदार्पण कर रहे हैं।
- दीपक पूनिया, 98 किग्रा: पिछले एशियाई खेलों में 86 किग्रा वर्ग में रजत जीतने वाले दीपक इस बार नए भार वर्ग में चुनौती पेश करेंगे।
- सुनील कुमार, ग्रीको रोमन 87 किग्रा: 2022 के एशियाई खेलों के कांस्य पदक विजेता सुनील ने इस साल एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप में भी कांस्य जीता है।
तैयारी में आईं चुनौतियां
इस बार राष्ट्रमंडल खेलों में कुश्ती शामिल न होने से पहलवानों की तैयारी प्रभावित हुई। बड़े बहुखेल आयोजनों में मिलने वाला प्रतिस्पर्धी अनुभव तैयारी का अहम हिस्सा होता है और उसकी कमी खल सकती है। इसके अलावा डोपिंग से जुड़े मामलों के चलते दल का आकार 18 से घटकर 15 पहलवानों का रह गया।
पिछले छह एशियाई खेलों का प्रदर्शन
2006 के दोहा एशियाई खेलों में भारत ने कुश्ती में एक रजत और पांच कांस्य जीते थे। 2010 के ग्वांगझू खेलों में तीन कांस्य मिले। 2014 के इंचियोन खेलों में एक स्वर्ण, एक रजत और तीन कांस्य आए। 2018 के जकार्ता खेलों में दो स्वर्ण और एक कांस्य मिला, जबकि 2022 के हांगझोऊ खेलों में एक रजत और पांच कांस्य भारत की झोली में आए।
आंकड़े बताते हैं कि भारतीय पहलवान लगभग हर बार पदक तालिका में योगदान देते रहे हैं। इस बार युवा और अनुभवी खिलाड़ियों का संतुलित मिश्रण दल को मजबूती दे रहा है।
