दिल्ली को बिन-मुक्त बनाने की तैयारी, हर वार्ड की बनेगी अलग कचरा प्रबंधन योजना

नई दिल्ली: राजधानी को कूड़ेदानों पर निर्भरता से बाहर निकालने की तैयारी शुरू हो गई है। निगम आयुक्त संजीव खिरवार ने सभी जोनल उपायुक्तों को निर्देश दिए हैं कि वे वार्डवार ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था का आकलन करें।
योजना के तहत करीब पांच से छह किलोमीटर के दायरे में गीले कचरे के विकेंद्रीकृत उपचार के लिए उपयुक्त भूमि और सुविधाओं की पहचान की जाएगी। इसमें सीबीजी, बायोगैस और कंपोस्टिंग जैसी तकनीकों के इस्तेमाल पर जोर रहेगा, ताकि कचरा वहीं निपट जाए जहां वह पैदा होता है।
संकरी गलियों में जाएंगे छोटे टिपर
आवासीय कल्याण संघों, ग्रुप हाउसिंग सोसायटी, अनधिकृत कॉलोनियों, झुग्गी बस्तियों, अस्पतालों और बाजारों के लिए अलग-अलग कचरा संग्रहण मॉडल अपनाए जाएंगे। संकरी गलियों में छोटे या विशेष डिजाइन वाले टिपर तैनात किए जाएंगे, ताकि घर-घर कचरा संग्रहण हो सके और सड़क किनारे कूड़ा डालने पर रोक लगे। बाजारों को भी चरणबद्ध तरीके से बिन-मुक्त बनाने की योजना है।
जीरो वेस्ट कॉलोनी मॉडल का विस्तार
अधिक आवाजाही वाले और वाणिज्यिक क्षेत्रों में रात्रिकालीन सफाई तथा मशीनीकृत गीली सफाई को मजबूत किया जाएगा। निगम की 823 जीरो वेस्ट कॉलोनियों के मॉडल को अन्य उपयुक्त क्षेत्रों में लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। लक्षित कॉलोनियों में आवासीय कल्याण संघों को श्रेडिंग मशीन उपलब्ध कराने की लागत और आर्थिक व्यवहार्यता का भी आकलन किया जाएगा।
आज से स्वच्छता ही सेवा अभियान
निगम 17 सितंबर से 17 अक्तूबर तक चलने वाले स्वच्छता ही सेवा 2026 अभियान में भाग लेगा। अभियान में गंदे स्थानों का कायाकल्प, सार्वजनिक स्थलों की सफाई, स्कूलों और युवाओं की भागीदारी तथा स्रोत पर कचरा पृथक्करण को बढ़ावा दिया जाएगा।
- सफाई मित्र: अभियान के दौरान सफाई मित्रों के कल्याण से जुड़ी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
- हरियाली: पौधारोपण कार्यक्रम भी अभियान का हिस्सा रहेंगे।
- वेस्ट टू आर्ट: कचरे से कलाकृति बनाने और प्लास्टिक रीसाइक्लिंग मेले जैसे आयोजन किए जाएंगे।
