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दिल्ली मेट्रो की पार्किंग होगी स्मार्ट, फास्टैग से कटेगा शुल्क और नकद की जरूरत नहीं

16 September 2026
दिल्ली मेट्रो की पार्किंग होगी स्मार्ट, फास्टैग से कटेगा शुल्क और नकद की जरूरत नहीं

नई दिल्ली: मेट्रो स्टेशन की पार्किंग में गाड़ी खड़ी करने के बाद खुले पैसे ढूँढ़ने का झंझट जल्द खत्म हो सकता है। दिल्ली मेट्रो रेल निगम ने दो स्टेशनों पर फास्टैग आधारित स्मार्ट पार्किंग शुरू करने के लिए निविदा जारी की है, जहाँ शुल्क अपने आप कट जाएगा।

पहले चरण में यह सुविधा जामिया मिल्लिया इस्लामिया और जसोला विहार शाहीन बाग स्टेशनों पर दी जाएगी। निविदा में पार्किंग की रूपरेखा तैयार करने, उसे विकसित करने और फिर संचालन तथा रखरखाव का काम शामिल है, जिस पर करीब एक करोड़ 26 लाख रुपये खर्च का अनुमान है।

नकद नहीं, कई विकल्प

नई व्यवस्था में भुगतान के लिए फास्टैग के अलावा यूपीआई, नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड, डेबिट और क्रेडिट कार्ड तथा ई-वॉलेट का इस्तेमाल किया जा सकेगा। नकद भुगतान का विकल्प इन पार्किंग स्थलों पर नहीं रखा गया है, जिससे प्रवेश और निकास दोनों जगह कतार घटने की उम्मीद है।

  • चार पहिया वाहन: छह घंटे तक 30 रुपये और बारह घंटे तक 50 रुपये।
  • दोपहिया वाहन: छह घंटे तक 15 रुपये और बारह घंटे तक 25 रुपये।
  • मासिक पास: रोजाना आने-जाने वालों के लिए मासिक पास का प्रस्ताव भी रखा गया है।
  • दिव्यांगजन: उनके वाहनों के लिए अलग से स्थान आरक्षित रहेगा।

आगे और स्टेशनों पर विस्तार

निगम के कर्मचारियों के वाहनों के लिए इन पार्किंग स्थलों पर शुल्क नहीं लिया जाएगा। योजना है कि दोनों स्टेशनों पर व्यवस्था स्थिर होने के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से दूसरे स्टेशनों तक बढ़ाया जाए, खासकर उन जगहों पर जहाँ सुबह और शाम वाहनों की आवाजाही सबसे ज्यादा रहती है।

सुविधा कब से आम यात्रियों के लिए खुलेगी, इसकी तारीख अभी घोषित नहीं की गई है। निविदा प्रक्रिया पूरी होने और काम आवंटित होने के बाद ही समयसीमा साफ हो सकेगी।

मेट्रो से रोजाना सफर करने वाले बड़ी संख्या में यात्री अपने वाहन स्टेशन तक लाकर वहीं खड़े करते हैं और आगे का सफर मेट्रो से तय करते हैं। ऐसे यात्रियों के लिए पार्किंग में लगने वाला समय पूरे सफर की योजना का हिस्सा होता है, इसलिए प्रवेश और निकास पर लगने वाला एक-एक मिनट मायने रखता है।

स्वचालित व्यवस्था में गाड़ी के अंदर आने और बाहर जाने का समय अपने आप दर्ज हो जाता है, जिससे शुल्क को लेकर होने वाली बहस की गुंजाइश भी घट जाती है। यही वजह है कि निगम इसे पहले दो स्टेशनों पर आजमाकर देखना चाहता है।