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दिल्ली में तीसरी रिंग रोड की तैयारी: 55 किमी लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर छह चरणों में बनेगा

14 September 2026
दिल्ली में तीसरी रिंग रोड की तैयारी: 55 किमी लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर छह चरणों में बनेगा

नई दिल्ली: राजधानी को जाम से राहत दिलाने के लिए दिल्ली सरकार ने पैरलल रिंग रोड का मास्टर प्लान तैयार कर लिया है। मौजूदा इनर और आउटर रिंग रोड के समानांतर प्रस्तावित यह तीसरी रिंग रोड 55 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर के रूप में बनेगी, जिसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट पूरी हो चुकी है।

सरकार ने 2026-27 के बजट में इसकी व्यवहार्यता अध्ययन के लिए 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। लोक निर्माण विभाग ने परियोजना पर काम तेज कर दिया है। सरकार का घोषित लक्ष्य बिना रुकावट कनेक्टिविटी है, जिसके तहत जलवायु अनुरूप और तकनीक आधारित सड़कों का निर्माण किया जाएगा।

छह चरणों में बनेगा कॉरिडोर

पूरे कॉरिडोर को छह चरणों में बनाया जाएगा। पहला चरण मुकरबा चौक से आश्रम तक होगा। इसके बाद आजादपुर फ्लाईओवर से आईएसबीटी हनुमान मंदिर तक 9.5 किलोमीटर, चांदगी राम अखाड़ा से मजनू का टीला तक 2.5 किलोमीटर और आईएसबीटी से डीएनडी फ्लाईओवर तक 11.5 किलोमीटर के खंडों को प्राथमिकता से लिया जाएगा।

  • कुल लंबाई: 55 किलोमीटर, मुकरबा चौक से डीएनडी होते हुए आश्रम तक।
  • लागत अनुमान: निर्माण पर करीब 7,000 करोड़ रुपये।
  • दावा: उत्तरी दिल्ली से दक्षिणी दिल्ली का सफर घटकर 30 मिनट रह जाएगा।

सिर्फ फ्लाईओवर से काम नहीं चलेगा

लोक निर्माण विभाग ने यातायात पुलिस के साथ मिलकर शहर के 10 बड़े चोक पॉइंट्स की पहचान की थी, जिनमें रिंग रोड, मथुरा रोड, अरबिंदो मार्ग, महरौली-महिपालपुर रोड और रानी झांसी रोड शामिल हैं। विभाग का आकलन है कि अलग-अलग जगह फ्लाईओवर बनाने भर से समस्या हल नहीं होगी, क्योंकि व्यस्त समय में अकेले रिंग रोड पर ढाई लाख से ज्यादा वाहन होते हैं। यही तर्क एक पूरी नई समानांतर रिंग रोड के पक्ष में दिया गया है।

सड़कों के बजट में 54 प्रतिशत की बढ़ोतरी

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 24 मार्च 2026 को पेश बजट में लोक निर्माण विभाग के लिए 5,921 करोड़ रुपये आवंटित किए थे, जो पिछले वर्ष के 3,843 करोड़ रुपये से 54 प्रतिशत अधिक है। परिवहन का कुल बजट 8,374 करोड़ रुपये रखा गया, जिसमें मेट्रो फेज-4 और 5 के लिए 2,885 करोड़, आरआरटीएस और एनसीआर कनेक्टिविटी के लिए 568 करोड़ तथा ई-बस व चार्जिंग ढांचे के लिए 1,200 करोड़ रुपये शामिल हैं।

रास्ते की चुनौतियां भी कम नहीं

परियोजना की डीपीआर परामर्शदाता एईकॉम इंडिया ने तैयार की है। हालांकि रास्ता आसान नहीं है। अभी स्वीकृत 10 करोड़ रुपये सिर्फ रिपोर्ट के लिए हैं, जबकि भूमि अधिग्रहण और पेड़ों की कटाई की प्रक्रिया में दो साल तक लग सकते हैं। मौजूदा रिंग रोड के ऊपर एलिवेटेड ढांचा खड़ा करने में यूटिलिटी शिफ्टिंग सबसे बड़ी चुनौती मानी जा रही है। बीते दस वर्षों में इसी तरह की रिंग का प्रस्ताव तीन बार ठंडे बस्ते में जा चुका है, इसलिए इस बार डीपीआर पूरी होने और बजट प्रावधान होने को ही पहला ठोस कदम माना जा रहा है।