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विश्वकर्मा पूजा आज: जानें औजारों और कारखानों की पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि

17 September 2026
विश्वकर्मा पूजा आज: जानें औजारों और कारखानों की पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि

नई दिल्ली: आज गुरुवार, 17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा है। हिंदू पंचांग के अनुसार हर वर्ष कन्या संक्रांति पर सृष्टि के सबसे बड़े शिल्पकार भगवान विश्वकर्मा का प्राकट्य पर्व मनाया जाता है।

सूर्य जब सिंह राशि की अपनी यात्रा को विराम देते हुए कन्या राशि में प्रवेश करते हैं, उसे कन्या संक्रांति कहा जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार 17 सितंबर को सुबह 7 बजकर 58 मिनट पर सूर्य कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। इसी दिन सृष्टि के वास्तुकार और शिल्पकार भगवान विश्वकर्मा की पूजा का विशेष विधान है। इस दिन मशीनों, औजारों, वाहनों, कारखानों और कार्यस्थल पर इस्तेमाल होने वाली चीजों की भी पूजा होती है।

पूजा के तीन शुभ मुहूर्त

  • सुबह: 7 बजकर 58 मिनट से 10 बजकर 43 मिनट तक।
  • दोपहर: 12 बजकर 15 मिनट से 1 बजकर 48 मिनट तक।
  • शाम: 4 बजकर 52 मिनट से 6 बजकर 24 मिनट तक।

इन तीनों मुहूर्त में कारखाने, वाहन और औजारों की पूजा की जा सकती है। दिन में राहुकाल के समय को अशुभ माना जाता है, इसलिए इस दौरान पूजा से बचना चाहिए। 17 सितंबर को राहुकाल दोपहर 1 बजकर 48 मिनट से 3 बजकर 20 मिनट तक रहेगा।

कौन हैं भगवान विश्वकर्मा

शास्त्रों के अनुसार भगवान विश्वकर्मा सृष्टि के पहले शिल्पकार, वास्तुकार और अभियंता हैं। मान्यता है कि जब ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की तो निर्माण का कार्य भगवान विश्वकर्मा को सौंपा गया था। उन्हीं के हाथों इंद्रपुरी, त्रेता में लंका, द्वापर में द्वारिका और हस्तिनापुर तथा कलियुग में जगन्नाथपुरी का निर्माण माना जाता है। सुदर्शन चक्र, शिवजी का त्रिशूल, पुष्पक विमान और इंद्र का वज्र भी उन्हीं की रचना माने जाते हैं।

पूजा की विधि

इस दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करके पूजा का संकल्प लिया जाता है। इसके बाद कार्यक्षेत्र में औजारों और मशीनों की सफाई करके भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या चित्र स्थापित किया जाता है और रोली, अक्षत तथा फल-फूल से पूजा की जाती है। सभी औजारों और मशीनों पर कलावा बांधकर मिठाई अर्पित की जाती है और आरती के बाद प्रसाद बांटा जाता है। पूजा के दौरान ॐ विश्वकर्मणे नमः मंत्र का उच्चारण किया जाता है।

मान्यता है कि इस दिन भगवान विश्वकर्मा की पूजा-अर्चना से व्यापार में तरक्की और उन्नति मिलती है तथा कार्यस्थल पर नई ऊर्जा का संचार होता है। यही वजह है कि देशभर के कारखानों, कार्यशालाओं और वाहन स्वामियों के लिए यह दिन खास होता है।