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अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर को, गणेश विसर्जन के लिए मिलेंगे पाँच शुभ मुहूर्त

16 September 2026
अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर को, गणेश विसर्जन के लिए मिलेंगे पाँच शुभ मुहूर्त

मुंबई: दस दिन चलने वाले गणेश उत्सव का समापन इस साल शुक्रवार 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन होगा। इसी दिन घरों और पंडालों में स्थापित प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा। गणेश स्थापना 14 सितंबर को हुई थी।

पंचांग के अनुसार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर की रात 11 बजकर 18 मिनट पर शुरू होगी और 25 सितंबर की रात 11 बजकर 6 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के हिसाब से व्रत और पूजा 25 सितंबर को ही की जाएगी।

पूजा के लिए पूरे दिन का समय

इस बार पूजा के लिए समय की कोई कमी नहीं है। सुबह 6 बजकर 11 मिनट से रात 11 बजकर 6 मिनट तक, यानी करीब 16 घंटे 55 मिनट का लंबा दायरा पूजा के लिए उपलब्ध रहेगा। सुबह 6 बजकर 11 मिनट से 11 बजकर 22 मिनट तक रवि योग भी बन रहा है, जिसे शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है।

दिन में शूल योग दोपहर 2 बजकर 51 मिनट तक रहेगा, उसके बाद गण्ड योग शुरू होगा। नक्षत्रों की बात करें तो सुबह 11 बजकर 22 मिनट तक शतभिषा नक्षत्र रहेगा और फिर पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र लग जाएगा।

विसर्जन के मुहूर्त

  • सुबह: 6 बजकर 11 मिनट से 10 बजकर 42 मिनट तक।
  • दोपहर: 12 बजकर 13 मिनट से 1 बजकर 43 मिनट तक, शुभ चौघड़िया।
  • शाम: 4 बजकर 44 मिनट से 6 बजकर 14 मिनट तक, चर चौघड़िया।
  • रात: 9 बजकर 14 मिनट से 10 बजकर 43 मिनट तक।
  • देर रात: 26 सितंबर की रात 12 बजकर 13 मिनट से सुबह 4 बजकर 42 मिनट तक।

परंपरा के अनुसार विसर्जन से पहले प्रतिमा की अंतिम आरती की जाती है, मोदक या लड्डू का भोग लगाया जाता है और परिवार के सदस्य अगले साल फिर आने की प्रार्थना करते हैं। बड़े शहरों में विसर्जन के लिए कृत्रिम तालाब भी बनाए जाते हैं, जिनका इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है।

अनंत चतुर्दशी का अपना अलग महत्व भी है। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा की जाती है और व्रत रखने वाले हाथ में चौदह गाँठ वाला अनंत सूत्र बाँधते हैं। यही वजह है कि गणेश उत्सव का समापन और यह व्रत एक ही दिन पड़ने से दिन भर घरों और मंदिरों में गतिविधि बनी रहती है।

जिन घरों में डेढ़ दिन, तीन दिन, पाँच दिन या सात दिन की स्थापना की जाती है, वहाँ विसर्जन पहले ही हो चुका होता है। दस दिन की स्थापना करने वाले परिवार और सार्वजनिक पंडाल इसी अंतिम तिथि पर विसर्जन करते हैं, इसलिए इस दिन शोभायात्राओं की संख्या सबसे ज्यादा रहती है।