दिवाली-दशहरा पर घर जाना होगा महंगा: जेट फ्यूल के दाम लगातार दूसरे महीने बढ़े, एयरलाइंस बढ़ा सकती हैं हवाई किराया

नई दिल्ली | आगामी फेस्टिव सीजन (दुर्गा पूजा, दशहरा और दिवाली) में हवाई सफर करने की योजना बना रहे लोगों के लिए झटका देने वाली खबर है। विमान ईंधन (Aviation Turbine Fuel - ATF) की कीमतों में लगातार दूसरे महीने भारी बढ़ोतरी हुई है। इस बार एटीएफ में 5.46% (6.28 रुपये प्रति लीटर) का इजाफा किया गया है। दिल्ली में अब जेट फ्यूल के दाम बढ़कर 121.28 रुपये प्रति लीटर पहुंच गए हैं।
अगस्त में हुई करीब 5 रुपये की बढ़ोतरी के बाद पिछले छह हफ्तों में एटीएफ के दाम कुल 11.5 रुपये प्रति लीटर से अधिक बढ़ चुके हैं। चूंकि एयरलाइंस के कुल संचालन खर्च (ऑपरेटिंग कॉस्ट) में 40% तक हिस्सेदारी केवल ईंधन की होती है, ऐसे में एविएशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि एयरलाइंस इस बढ़ी हुई लागत का भार फ्यूल सरचार्ज या किराए में बढ़ोतरी कर यात्रियों की जेब पर डालेंगी।
एटीएफ की कीमतों में उछाल: 4 बड़े फैक्ट्स
- ताजा बढ़ोतरी: दिल्ली में एटीएफ 6.28 रुपये प्रति लीटर बढ़कर 121.28 रुपये प्रति लीटर हुआ।
- लगातार दूसरा झटका: अगस्त में 5 रुपये की बढ़ोतरी के बाद लगातार दूसरे महीने 5.46% का इजाफा; जुलाई की तुलना में दाम 10% तक चढ़े।
- एयरलाइंस की लागत: विमानन कंपनियों के कुल परिचालन खर्च में जेट फ्यूल की हिस्सेदारी लगभग 35 से 40% होती है।
- फेस्टिव सीजन पर असर: दुर्गा पूजा, दशहरा और दिवाली के दौरान मांग बढ़ने से टिकट दरों में उछाल आना तय माना जा रहा है।
क्या सीधे बढ़ेंगे टिकट के दाम और एक्सपर्ट्स का क्या है कहना?
क्या टिकट के दाम में भी सीधे 5-6% की बढ़ोतरी होगी?
अंतरराष्ट्रीय उपभोक्ता नीति विशेषज्ञ प्रोफेसर बेजोन कुमार मिश्रा के अनुसार, एटीएफ में 5.46% की वृद्धि का सीधा मतलब यह नहीं है कि हवाई टिकट भी 5.46% महंगे हो जाएंगे। उन्होंने बताया कि एयरलाइंस के टिकट की दरें कई पैमानों—जैसे रूट की मांग, उपलब्ध सीटें, प्रतिस्पर्धा और एडवांस बुकिंग के पैटर्न पर तय होती हैं। हालांकि, लागत बढ़ने से बेस फेयर और फ्यूल चार्ज में आंशिक बढ़ोतरी अवश्य देखने को मिलेगी।
एयरलाइंस के पास बढ़ोतरी सहने की गुंजाइश खत्म?
विमानन उद्योग के दिग्गज अजय जसरा का कहना है कि भारतीय विमानन कंपनियां पहले से ही बेहद प्रतिस्पर्धी और कम मुनाफे वाले माहौल में काम कर रही हैं। एयरलाइंस शुरुआत में बढ़ी लागत का कुछ हिस्सा खुद वहन कर सकती हैं, लेकिन लगातार दूसरे महीने दाम बढ़ने से उनकी क्षमता सीमित हो गई है। खासकर उन घरेलू रूट्स पर जहां पहले से मार्जिन कम है, वहां एयरलाइंस के पास किराया बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।
एक्सपर्ट बोले- सरकार से राहत नहीं, खामियाजा आम यात्री भुगतेगा
फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) के अध्यक्ष और DGCA के पूर्व अधिकारी कैप्टन सी.एस. रंधावा ने कहा कि सरकार की ओर से एयरलाइंस को ईंधन पर टैक्स छूट या सब्सिडी जैसी कोई राहत नहीं मिलती। उन्होंने कहा, "एयरलाइंस बढ़े हुए ईंधन अधिभार (Fuel Surcharge) का बोझ खुद नहीं उठाएंगी, बल्कि इसे यात्रियों से ही वसूलेंगी। फेस्टिव सीजन के नजदीक होने के कारण किराए बढ़ना तय है।"
लागत का गणित: 6 हफ्ते में ₹11.5 महंगा हुआ जेट फ्यूल
- ऊर्जा विशेषज्ञ सुधीर बिष्ट ने बताया कि विमान ईंधन किसी भी उड़ान के कुल परिचालन खर्च का करीब 40% हिस्सा होता है।
- ATF में 5-6% की बढ़ोतरी से एयरलाइंस की कुल इनपुट लागत में 2 से 2.5% तक का सीधा इजाफा हो जाता है।
- पिछले छह हफ्तों के भीतर दिल्ली में एटीएफ ₹11.5 प्रति लीटर से ज्यादा महंगा हो चुका है, जिससे एयरलाइंस की बैलेंस शीट पर भारी दबाव बन गया है।
बिष्ट के अनुसार, यह बढ़ोतरी सिर्फ तेल कंपनियों के मुनाफे के लिए नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों और भू-राजनीतिक तनाव (ईरान-अमेरिका के बीच तल्खी) के कारण ईंधन की वैश्विक कीमतें बढ़ी हैं।
यात्रियों पर क्या होगा असर?
त्योहारी सीजन में दिल्ली-पटना, दिल्ली-कोलकाता, मुंबई-वाराणसी और बेंगलुरु-दिल्ली जैसे अधिक मांग वाले रूट्स पर यात्रियों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यदि आपने अभी तक त्योहारों के लिए टिकट बुक नहीं किए हैं, तो आने वाले दिनों में लास्ट-मिनट बुकिंग के दौरान टिकट की कीमतें सामान्य से 15-30% तक ज्यादा चुकानी पड़ सकती हैं।
