ऊर्जा क्षेत्र में भारत की बड़ी छलांग: 2047 तक 50% पहुंचेगी बिजली की हिस्सेदारी, CEA ने पेश किया मास्टरप्लान

नई दिल्ली | भारत साल 2047 तक अपनी कुल ऊर्जा खपत में बिजली की हिस्सेदारी को मौजूदा 22 प्रतिशत से बढ़ाकर 45 से 50 प्रतिशत तक ले जाने की तैयारी में है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के चेयरपर्सन घनश्याम प्रसाद ने बुधवार को ‘भारत इलेक्ट्रिसिटी 2026’ कार्यक्रम में देश के इस महत्वाकांक्षी पावर रोडमैप का खाका पेश किया। उन्होंने कहा कि नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने और तेजी से बढ़ती डिजिटल व इंडस्ट्रियल अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए बिजली क्षेत्र में यह बड़ा बदलाव बेहद जरूरी है।
इस महाप्लान की 5 बड़ी बातें (Key Highlights):
बड़ा उछाल: ऊर्जा बास्केट में बिजली की हिस्सेदारी 2047 तक 22% से बढ़ाकर 45-50% करने का लक्ष्य।
परमाणु और हाइड्रो का टारगेट: 2047 तक 100 GW परमाणु ऊर्जा और 2035-36 तक 100 GW पंप युक्त जलविद्युत (Pumped Hydro) भंडारण क्षमता हासिल की जाएगी।
रिकॉर्ड क्षमता विस्तार: पिछले वर्ष देश ने 64,000 मेगावाट नई बिजली क्षमता जोड़ी; इस वर्ष 70,000 मेगावाट क्षमता जोड़ने का लक्ष्य।
भारी-भरकम निवेश: 266 गीगावाट स्वच्छ बिजली को ग्रिड तक पहुंचाने के लिए ₹4 लाख करोड़ की ट्रांसमिशन परियोजनाओं पर काम जारी।
गैर-जीवाश्म क्षमता में उछाल: भारत 300 गीगावाट से अधिक गैर-जीवाश्म आधारित स्थापित विद्युत क्षमता का आंकड़ा पार कर चुका है।
2047 का विजन: डिजिटल और ट्रांसपोर्ट सेक्टर की बढ़ेगी डिमांड
CEA के चेयरपर्सन घनश्याम प्रसाद ने कहा, "वर्तमान में भारत की कुल ऊर्जा खपत में बिजली की हिस्सेदारी केवल 22 प्रतिशत है। भारत को नेट-जीरो लक्ष्य हासिल करने और आर्थिक बदलाव को गति देने के लिए 2047 तक इसे 45-50 प्रतिशत तक पहुंचाना होगा। इससे भविष्य में उद्योग, इलेक्ट्रिक ट्रांसपोर्ट और डेटा सेंटर्स जैसी डिजिटल अवसंरचना की भारी बिजली मांग को आसानी से पूरा किया जा सकेगा।"
उन्होंने जोर देकर कहा कि यह योजना जितनी महत्वाकांक्षी है, देश के प्रत्येक नागरिक को सस्ती, स्वच्छ और निर्बाध बिजली देने के लिए उतनी ही जरूरी भी है।
पिछले साल बना नया रिकॉर्ड, इस साल 70,000 MW का टारगेट
ऊर्जा उत्पादन में आ रही तेजी का जिक्र करते हुए घनश्याम प्रसाद ने बताया कि भारत ने पिछले साल रिकॉर्ड 64,000 मेगावाट (64 GW) नई विद्युत उत्पादन क्षमता ग्रिड में जोड़ी। इसमें 50,000 मेगावाट से अधिक का योगदान अकेले नवीकरणीय ऊर्जा (सोलर व विंड) का रहा।
उन्होंने बताया कि इस चालू वित्त वर्ष में देश का लक्ष्य 70,000 मेगावाट तक नई क्षमता ग्रिड से जोड़ने का है। इसके अलावा, भारत 2035 तक अपने 2030 के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को दोगुना करने की सही दिशा में आगे बढ़ रहा है।
₹4 लाख करोड़ का ट्रांसमिशन नेटवर्क और AI की मदद
अक्षय ऊर्जा संयंत्रों से बिजली को शहरों और उद्योगों तक पहुंचाने के लिए आधुनिक ग्रिड तैयार किया जा रहा है।
₹4 लाख करोड़ की परियोजनाएं: 266 गीगावाट स्वच्छ ऊर्जा की ट्रांसमिशन क्षमता विकसित करने के लिए 4 लाख करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं।
ट्रांसफॉर्मर क्षमता: 600 गीगावॉल्ट-एम्पियर (GVA) की ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता तैयार की जा रही है।
ग्रिड में AI का इस्तेमाल: बिजली ग्रिड को स्थिर रखने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और उन्नत मौसम पूर्वानुमान प्रणालियों की मदद ली जाएगी।
नए ग्रीन एनर्जी प्लांट्स को 24 से 36 महीने के भीतर नेशनल ग्रिड से जोड़ने की समयसीमा तय की गई है।
300 GW पार हुई स्वच्छ ऊर्जा क्षमता: डी. साई बाबा
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विद्युत मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव डी. साई बाबा ने बताया कि भारत 300 गीगावाट से अधिक गैर-जीवाश्म (Non-fossil) आधारित बिजली उत्पादन क्षमता हासिल कर चुका है।
उन्होंने कहा, "हमारी सबसे बड़ी चुनौती इस भारी ग्रीन एनर्जी क्षमता को सही समय और सही स्थान पर भरोसेमंद व किफायती बिजली में बदलना है, जिसके लिए भविष्य की जरूरतों के अनुसार एक मजबूत नेशनल ग्रिड तैयार किया जा रहा है।"
