BREAKINGBreaking headlines from Uttar Pradesh, Uttarakhand, Delhi, and beyond.
Aaj Ka Sach
Home /delhi

407 ग्लेशियल झीलें बनीं टाइम बम: नेपाल आपदा के बाद UN ने जारी किया वैश्विक अलर्ट

31 August 2026
407 ग्लेशियल झीलें बनीं टाइम बम: नेपाल आपदा के बाद UN ने जारी किया वैश्विक अलर्ट

नई दिल्ली:नेपाल-तिब्बत सीमा के निकट ग्लेशियर टूटने के बाद आई प्रलयंकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। इस विनाशकारी प्राकृतिक आपदा ने पूरी दुनिया को हिमालयी क्षेत्र की पर्यावरणीय संवेदनशीलता और ग्लोबल वॉर्मिंग के खतरों के प्रति फिर सचेत कर दिया है।

इस त्रासदी पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए संयुक्त राष्ट्र (UN) के जलवायु प्रमुख साइमन स्टील ने वैश्विक स्तर पर चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा कि हिंदू कुश हिमालय का पूरा क्षेत्र जलवायु परिवर्तन की वजह से बेहद नाजुक और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है।

ग्लेशियर टूटने से भयंकर आपदा: चीन सीमा के पास ग्लेशियर टूटने से भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में आए उफान से घर, पुल और सड़कें बह गईं; सैकड़ों हताहत और हजारों लोग लापता हैं।

UN क्लाइमेट चीफ की चेतावनी: साइमन स्टील बोले— कोयला, तेल और गैस जलाने से लगातार गर्म हो रही धरती के कारण ऐसी आपदाएं अब पहले से अधिक घातक और बार-बार आ रही हैं।

भारत के सीमावर्ती इलाकों में अलर्ट: नेपाल की नदियों में उफान से उत्तर प्रदेश और बिहार में नारायणी-गंडक नदी का जलस्तर बढ़ा, कई तटीय गांवों में अलर्ट घोषित।

'इंसान जला रहे कोयला-तेल, कीमत चुका रहा हिमालय' : साइमन स्टील

संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC) के कार्यकारी सचिव साइमन स्टील ने कहा कि वैज्ञानिक और स्थानीय समुदाय वर्षों से आगाह करते आ रहे हैं कि हिंदू कुश हिमालय जलवायु परिवर्तन के भारी जोखिम में है।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा— "इंसान जिस अंधाधुंध गति से कोयला, तेल और गैस जला रहे हैं, उससे जलवायु तेजी से गर्म हो रही है। यही कारण है कि दुनिया भर में ऐसी त्रासदियां अधिक गंभीर और बार-बार हो रही हैं, जिनका सबसे क्रूर असर कमजोर और पर्वतीय समुदायों पर पड़ता है।" उन्होंने संकट के समाधान के लिए फॉसिल फ्यूल (जीवाश्म ईंधन) को छोड़कर फौरन रिन्यूएबल एनर्जी (नवीकरणीय ऊर्जा) अपनाने और क्लाइमेट रेजिलिएंस में निवेश बढ़ाने पर बल दिया।

भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में मलबे का प्रलय, भारी जनहानि

चीन सीमा के पास ग्लेशियर का एक बड़ा हिस्सा टूटने से भोटेकोशी और त्रिशूली नदी प्रणालियों में एकाएक पानी और मलबे का विशाल सैलाब उमड़ पड़ा। अचानक आई इस बाढ़ (Flash Flood) ने कई जिलों में बुनियादी ढांचे को नेस्तनाबूद कर दिया। आवासीय मकान, प्रमुख सड़कें और संपर्क पुल ताश के पत्तों की तरह बह गए। इस आपदा में सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि चार हजार से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं।

उत्तर प्रदेश और बिहार के गंडक-नारायणी तटवर्ती इलाकों में अलर्ट

नेपाल में आई इस भीषण त्रासदी का असर निचले मैदानी भारतीय इलाकों में भी देखा जा रहा है। नेपाल के कैचमेंट एरिया से भारी मात्रा में पानी और सिल्ट आने के चलते उत्तर प्रदेश और बिहार में नारायणी व गंडक नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। खतरे को देखते हुए प्रशासन ने सीमावर्ती और बाढ़ की आशंका वाले गांवों को अलर्ट पर रखा है तथा तटीय तटबंधों की 24 घंटे निगरानी शुरू कर दी है।

UN स्टडी का अलर्ट: हिमालय में 407 झीलों पर मंडरा रहा है खतरा

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र विश्वविद्यालय - इंस्टीट्यूट फॉर एनवायरनमेंट एंड ह्यूमन सिक्योरिटी (UNU-EHS, बॉन) के ग्लेशियर वैज्ञानिक डॉ. दीपेश चपागाइन के नेतृत्व में हुई एक अंतरराष्ट्रीय रिसर्च में खुलासा हुआ है कि हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र में 407 ग्लेशियल झीलें ऐसी हैं, जिनके फटने (GLOF) का सीधा खतरा बना हुआ है। वैज्ञानिकों द्वारा 493 ऐतिहासिक घटनाओं के विश्लेषण से स्पष्ट हुआ है कि तापमान बढ़ने से ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे भविष्य में ऐसी आपदाओं की पुनरावृत्ति का अंदेशा कई गुना बढ़ गया है।