सोनिया गांधी की आत्मकथा 'Belonging' पर सियासी घमासान: भारत में प्रकाशन रुकने पर कांग्रेस ने मोदी सरकार को घेरा

नई दिल्ली |कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी की आने वाली आत्मकथा को लेकर देश के सियासी गलियारों में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पब्लिशिंग हाउस 'पेंग्विन इंडिया' ने सोनिया गांधी के इस बहुप्रतीक्षित संस्मरण को भारत में पब्लिश करने से मना कर दिया है।
सूत्रों के मुताबिक, प्रकाशक चाहते थे कि सोनिया गांधी किताब से उन हिस्सों को एडिट करें या हटा दें, जिनमें मोदी सरकार की नीतियों (विशेष रूप से चीन के साथ संबंधों) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की तीखी आलोचना की गई है। लेकिन सोनिया गांधी ने इन हिस्सों में किसी भी तरह का बदलाव करने से साफ इनकार कर दिया, जिसके बाद यह विवाद गहरा गया।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया है कि केंद्र की मोदी सरकार के भारी दबाव के चलते पब्लिशर ने यह कदम उठाया है।
कांग्रेस का केंद्र और प्रकाशक पर सीधा हमला: 'उत्तर कोरिया जैसा रवैया'
इस पूरे मामले पर कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने केंद्र सरकार और पब्लिशिंग हाउस को आड़े हाथों लिया है:
बी.के. हरिप्रसाद (सदस्य, CWC):
"यह पेंग्विन इंडिया का पूरी तरह से अलोकतांत्रिक रुख है। साफ है कि किताब को रोकने के लिए सरकार की तरफ से भारी दबाव है। कोई भी प्रकाशक किसी लेखक से उसकी आत्मकथा के अंश बदलने को नहीं कह सकता। केवल उत्तर कोरिया के प्रकाशक ही ऐसा तानाशाही व्यवहार कर सकते हैं। विपक्ष के नाते सरकार की कमियों और नीतियों को उजागर करना हमारी संवैधानिक जिम्मेदारी है।"
के. राजू (सदस्य, CWC):
"जो किताब पूरी दुनिया में पब्लिश हो सकती है, वह अचानक भारत में छपने लायक क्यों नहीं रही? ऐसा लगता है कि पेंग्विन इंडिया ने मोदी सरकार के दबाव के आगे घुटने टेक दिए हैं। सच को किसी भी तरह की सेंसरशिप की जरूरत नहीं होती। यह पब्लिशिंग इंडस्ट्री की साख पर बड़ा आघात है।"
बी.एम. संदीप (पदाधिकारी, AICC):
"सोनिया गांधी ने 2004 से 2014 तक यूपीए का सफल नेतृत्व किया और देश को आगे बढ़ाया। उन्होंने भारतीय मूल्यों और संस्कृति को पूरी तरह अपनाया है। बीजेपी ने हमेशा उनके विदेशी मूल पर राजनीति की, जिसे देश के मतदाताओं ने खारिज कर दिया। उनके संस्मरण को दबाने की कोशिश सफल नहीं होगी।"
पेंग्विन इंडिया का क्या है पक्ष?
विवाद बढ़ने के बाद पेंग्विन इंडिया ने सार्वजनिक बयान जारी कर कहा कि वह इस आत्मकथा को पब्लिश नहीं कर रहा है, हालांकि वे इसे छापने के लिए बेहद उत्सुक थे। प्रकाशक ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि किताबों के 'सर्वोत्तम हित' में तथ्यों की जांच (Fact-Check) करना और लेखक को संपादकीय सुझाव देना प्रकाशक का कानूनी विशेषाधिकार और नैतिक जिम्मेदारी है।
क्या है किताब में?: इटली के बचपन से लेकर 2014 के सत्ता परिवर्तन तक का सफर
किताब का नाम: 'बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव' (Belonging: A Journey of Love)
रिलीज की तारीख: 10 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिलीज प्रस्तावित।
अंतरराष्ट्रीय प्रकाशक: पेंग्विन रैंडम हाउस का ही पब्लिशिंग हाउस 'अल्फ्रेड ए. नॉपफ' (Alfred A. Knopf)।
किताब की विषयवस्तु: इसमें इटली में सोनिया गांधी का बचपन, 1965 में कैंब्रिज में राजीव गांधी से पहली मुलाकात, भारत आगमन, गांधी परिवार के साथ जीवन, भारतीय राजनीति के उतार-चढ़ाव, 2004 में यूपीए सरकार का गठन और 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद की राजनीतिक परिस्थितियों का बेबाक विवरण दर्ज है।
