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उत्तराखंड में 200 से ज्यादा मदरसों पर लटकी बंदी की तलवार: बोर्ड भंग हुए 2 महीने बीते, अब तक नहीं किया आवेदन; प्रशासन करेगा सील

31 August 2026
उत्तराखंड में 200 से ज्यादा मदरसों पर लटकी बंदी की तलवार: बोर्ड भंग हुए 2 महीने बीते, अब तक नहीं किया आवेदन; प्रशासन करेगा सील

देहरादून
उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड भंग हुए दो महीने बीत जाने के बाद भी प्रदेश के अधिकांश मदरसे बिना मान्यता के संचालित हो रहे हैं। राज्य के कुल 452 मदरसों में से 200 से अधिक मदरसे ऐसे हैं, जिन्होंने शिक्षा विभाग और अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता लेने के लिए अब तक आवेदन तक नहीं किया है। शासन ने ऐसे सभी गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए इन्हें बंद करने की तैयारी पूरी कर ली है।

3 बड़ी बातें:

200+ मदरसे होंगे बंद: जिन्होंने मान्यता के लिए आवेदन नहीं किया, उन्हें जिला प्रशासन और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग बंद कराएगा।

कार्रवाई शुरू: हरिद्वार जिले के मंगलौर में दो अवैध मदरसों को प्रशासन द्वारा पहले ही सील किया जा चुका है।

छात्रों का नुकसान: मान्यता न होने के कारण इन मदरसों के छात्रों को मिड-डे मील, मुफ्त किताबें, यूनिफॉर्म और वैध प्रमाण पत्रों से वंचित होना पड़ रहा है।

मदरसा बोर्ड भंग कर मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने की थी पहल

मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को आधुनिक और मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने के मकसद से धामी सरकार ने 1 जुलाई 2026 को मदरसा बोर्ड को भंग कर उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया था। सरकार की मंशा थी कि मदरसों के छात्र सिर्फ धार्मिक शिक्षा तक सीमित न रहें, बल्कि वे विज्ञान, गणित और आधुनिक तकनीक सीखकर डॉक्टर, इंजीनियर, प्रशासनिक अधिकारी (सिविल सेवा), वकील और पायलट जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ सकें। लेकिन कई मदरसे अब भी मान्यता की प्रक्रिया से बचकर बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।

मान्यता न होने से बच्चों के भविष्य पर संकट: सुरजीत सिंह गांधी

राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष सुरजीत सिंह गांधी ने बताया कि बिना मान्यता चल रहे मदरसों के छात्रों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है:

सरकारी योजनाओं से वंचित: इन बच्चों को न तो मिड-डे मील मिल पा रहा है और न ही निशुल्क ड्रेस व पाठ्य पुस्तकें।

अमान्य डिग्रियां: शिक्षा विभाग की मान्यता के अभाव में इन मदरसों द्वारा जारी किए गए प्रमाण पत्र किसी भी उच्च शिक्षा या सरकारी नौकरी के लिए मान्य नहीं होंगे।

26 और मदरसों को 2 सितंबर को मिलेगी मान्यता

प्राधिकरण के अनुसार, मान्यता देने की प्रक्रिया तेज गति से चल रही है:

पहले सत्र में 7 मदरसों समेत 9 अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को विधिवत मान्यता दी जा चुकी है।

आगामी 2 सितंबर को 26 अन्य मदरसों को भी सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद मान्यता पत्र सौंपे जाएंगे।

इसके अलावा लगभग 200 मदरसों ने सरकार के इन्वेस्टमेंट पोर्टल के जरिए मान्यता के लिए ऑनलाइन आवेदन किया है, जिनकी जांच चल रही है।

"जिन मदरसों ने तय समय के भीतर मान्यता के लिए आवेदन नहीं किया है, उन्हें नियमानुसार बंद करने की कार्रवाई की जाएगी। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी और संबंधित जिला प्रशासन ऐसे सभी 200 से अधिक मदरसों को बंद करवाएंगे।"
— डॉ. पराग मधुकर धकाते, विशेष सचिव, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग