उत्तराखंड: राजधानी में पैदल चलना भी हुआ खतरनाक, राहगीरों की जान पर मंडरा रहा खतरा; आंकड़े कर देंगे हैरान

फुटपाथ पर कब्जा, सड़क पर मौत का पहरा: 7 महीने में 42 पैदल यात्रियों की गई जान; सुप्रीम कोर्ट के आदेश भी बेअसर
देहरादून: राजधानी देहरादून की सड़कों पर पैदल चलना अब जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है। शहर में कहीं फुटपाथों पर दुकानदारों और वाहनों का अवैध कब्जा है, तो कहीं पैदल चलने के लिए फुटपाथ तक नहीं बनाए गए हैं। नतीजतन, पैदल राहगीरों को मजबूरन मुख्य सड़क पर उतरना पड़ता है, जहां तेज रफ्तार वाहनों के बीच उनका हर कदम हादसों को न्योता दे रहा है।
देहरादून पुलिस के ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस साल के शुरुआती सात महीनों में ही 42 पैदल राहगीर सड़क हादसों में अपनी जान गंवा चुके हैं।
पुलिस विभाग के आंकड़े बताते हैं कि सड़क हादसों में सबसे ज्यादा शिकार पैदल चलने वाले लोग हो रहे हैं:
साल 2026 (1 जनवरी से 31 जुलाई): शहर में कुल 286 सड़क हादसे हुए, जिनमें 114 लोगों की मौत हुई। इनमें से 42 मृतक पैदल राहगीर थे।
साल 2025: पूरे वर्ष में हुए 265 हादसों में 123 लोगों ने जान गंवाई थी, जिनमें 43 पैदल यात्री शामिल थे।
चिंताजनक पहलू: आंकड़ों से साफ है कि शहर में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में मरने वाला लगभग हर तीसरा व्यक्ति पैदल चलने वाला राहगीर है।
फुटपाथ पर दुकानें और पार्किंग, सड़क पर चलने की मजबूरी
देहरादून की प्रमुख सड़कों पर बनाए गए फुटपाथ अपनी मूल उपयोगिता खो चुके हैं। कई प्रमुख बाजारों और चौराहों पर फुटपाथों पर दुकानों का सामान फैला रहता है या वहां दोपहिया वाहन पार्क कर दिए जाते हैं। कई इलाकों में तो सड़क चौड़ीकरण के नाम पर फुटपाथ का अस्तित्व ही खत्म कर दिया गया है। ऐसे में बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को तेज ट्रैफिक के बीच सड़क के किनारे से गुजरना पड़ता है।
सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस हवा, स्मार्ट सिटी के दावों पर सवाल
फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त रखने और पैदल यात्रियों की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं। इसके अलावा देहरादून को 'स्मार्ट सिटी' बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित क्रॉसिंग, जेब्रा क्रॉसिंग और बाधामुक्त फुटपाथ आज भी धरातल पर नदारद हैं।
"जल्द चलेगा संयुक्त अतिक्रमण हटाओ अभियान"
"फुटपाथों से अतिक्रमण हटाने के लिए संबंधित विभागों के साथ समन्वय बनाकर जल्द ही एक बड़ा अभियान चलाया जाएगा। पुलिस का प्राथमिक प्रयास है कि शहर के पैदल राहगीरों को सुरक्षित और बाधामुक्त रास्ता मिले, ताकि सड़क हादसों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।"
— प्रमेन्द्र डोबाल, एसएसपी, देहरादून
