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26 हजार नहीं, 1.60 लाख साल पुराना निकला मैमथ का कब्रिस्तान: 60 से ज्यादा हाथियों को निगलने वाले गड्ढे का रहस्य अब खुला

13 September 2026
26 हजार नहीं, 1.60 लाख साल पुराना निकला मैमथ का कब्रिस्तान: 60 से ज्यादा हाथियों को निगलने वाले गड्ढे का रहस्य अब खुला

साउथ डकोटा: अमेरिका के साउथ डकोटा स्थित ब्लैक हिल्स में मौजूद 'मैमथ साइट' दुनिया की सबसे असाधारण जीवाश्म जगहों में गिनी जाती है। एक प्राकृतिक गड्ढे में 60 से अधिक कोलंबियन मैमथ फंसकर मारे गए थे। अब एक नए अध्ययन ने इस जगह की उम्र को लेकर दशकों पुरानी समझ ही बदल दी है। पहले इसे करीब 26 हजार साल पुराना माना जाता था, जबकि नए आकलन में यह 1.60 लाख से 2.32 लाख साल पुरानी निकली है।

मकान बनाते वक्त संयोग से मिला था

यह जगह 1974 में पूरी तरह संयोग से सामने आई थी, जब आवासीय निर्माण के दौरान जमीन से दांत यानी टस्क बाहर निकल आए। खुदाई आगे बढ़ी तो पता चला कि यहां मैमथ की असाधारण भीड़ दबी हुई है, जिनमें अधिकतर नर और कम उम्र के थे। यह पूरे महाद्वीप में इस तरह का सबसे सघन जमावड़ा माना जाता है। यहां एक शॉर्ट-फेस्ड भालू, उत्तरी अमेरिकी ऊंट, भेड़िया और कोयोट के अवशेष भी मिले हैं।

क्यों नहीं निकल पाते थे जानवर

यह गड्ढा भूजल से चट्टान के घुलने से बना था। इसकी गहराई करीब चार से पांच मीटर थी और भीतर का पानी लगभग 32 से 35 डिग्री सेल्सियस तक गर्म रहता था। दीवारें खड़ी और फिसलन भरी थीं, इसलिए एक बार गिरने के बाद बाहर निकलना लगभग असंभव था।

दशकों तक क्यों उलझी रही उम्र

उम्र तय करने में सबसे बड़ी अड़चन यह रही कि यहां की हड्डियों में कोलेजन नहीं बचा था। इसलिए पुराने अध्ययनों में हड्डी के अपाटाइट की रेडियोकार्बन डेटिंग की गई, जो पानी वाली जगहों पर भरोसेमंद नहीं मानी जाती। छह अलग-अलग तारीखें 23 हजार से 42 हजार साल के बीच बिखरी रहीं, जबकि दूसरी तकनीकों ने 1.29 लाख, 1.50 लाख और 1.01 लाख साल तक के आंकड़े दिए।

अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की भूवैज्ञानिक एम्मा क्रोल्चिक के मुताबिक अपाटाइट में मौजूद पुराना कार्बन भूजल के कार्बन के साथ घुलकर दोबारा जम जाता है। उनके शब्दों में, यह मूल रूप से रेडियोकार्बन संकेत को रीसेट कर देता है।

रेत ने खोला राज, दो प्रयोगशालाओं ने की पुष्टि

नई टीम ने हड्डियों के बजाय आसपास की रेत की ल्यूमिनेसेंस डेटिंग का रास्ता चुना, जो बताती है कि उन कणों ने आखिरी बार कब सूरज की रोशनी देखी थी। क्वार्ट्ज संतृप्त निकला, यानी वह सिर्फ इतना बता सका कि उम्र कम से कम 75 हजार साल है। इसके बाद फेल्डस्पार का इस्तेमाल किया गया।

कुल 10 नमूने लिए गए, छह गड्ढे के भीतर से और चार बाहर से। खास बात यह रही कि नमूने उसी संग्रहालय भवन के भीतर से लिए गए जो खुदाई स्थल के ऊपर बना है, और दो स्वतंत्र प्रयोगशालाओं के नतीजे आपस में मेल खा गए।

'यह समय की गहराई में पन्ने पलटने जैसा है'

शोध की मुख्य लेखिका और यूएसजीएस की शोध भूवैज्ञानिक शैनन महान ने आम लोगों के सामने नमूने लेने की प्रक्रिया को विज्ञान शिक्षा का सबसे शुद्ध रूप बताया। साइट और यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना के एमेरिटस जिम मीड ने कहा कि वह हमेशा से इस जगह के लिए एक अलग कालक्रम पद्धति चाहते थे।

रॉयल अल्बर्टा म्यूजियम के क्यूरेटर और प्रमुख अन्वेषक क्रिस्टोफर जैस का मानना है कि आगे और मैमथ मिल सकते हैं, और दूसरी विलुप्त महाकाय प्रजातियां भी। एक केंद्रीय नमूना अपने पड़ोसी नमूनों से करीब 40 हजार साल कम उम्र का निकला, जिसकी जांच के लिए अब यूरेनियम-थोरियम डेटिंग की योजना है। गड्ढे का निचला एक तिहाई हिस्सा भंडारण की जगह की कमी के कारण अब भी बिना खुदाई के पड़ा है।