ETF निवेशकों के लिए बड़ा अपडेट, आज से लागू हुए SEBI के नए ट्रेडिंग नियम

नई दिल्ली: एक्सचेंज ट्रेडेड फंड यानी ETF में निवेश करने वालों के लिए 7 सितंबर 2026 से ट्रेडिंग के नियमों में बड़ा बदलाव लागू हो गया है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने ETF की बाजार कीमत को उसके वास्तविक नेट एसेट वैल्यू (NAV) के ज्यादा करीब रखने और ट्रेडिंग में पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से नए नियम लागू किए हैं।
SEBI ने 15 जून 2026 को जारी सर्कुलर के जरिए ETF की बेस प्राइस, प्राइस बैंड और गोल्ड-सिल्वर ETF की ट्रेडिंग व्यवस्था में बदलाव की घोषणा की थी। नए नियमों का मकसद खासतौर पर उन स्थितियों को कम करना है, जब कम लिक्विडिटी के कारण ETF की बाजार कीमत उसके अंडरलाइंग एसेट्स की वास्तविक कीमत से काफी अलग हो जाती है।
अब T-2 NAV के आधार पर तय नहीं होगी बेस प्राइस
नए नियमों के तहत ETF की बेस प्राइस तय करने की पुरानी व्यवस्था खत्म कर दी गई है। पहले इसके लिए दो दिन पुरानी यानी T-2 NAV का इस्तेमाल किया जाता था।
अब बेस प्राइस पिछले कारोबारी सत्र के आखिरी 30 मिनट में हुए कारोबार के वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP) के आधार पर तय होगी। इससे ETF की शुरुआती ट्रेडिंग कीमत पिछले दिन के वास्तविक बाजार कारोबार के ज्यादा करीब रहेगी।
हालांकि, यह व्यवस्था भी स्थायी नहीं है। 1 अप्रैल 2027 से ETF की बेस प्राइस सीधे पिछले कारोबारी दिन की क्लोजिंग NAV के आधार पर तय की जाएगी।
ETF के लिए बदला प्राइस बैंड
SEBI ने ETF के लिए लागू पुराने 20 प्रतिशत के फिक्स्ड प्राइस बैंड को भी हटा दिया है। अब इक्विटी और डेट ETF की ट्रेडिंग शुरुआत में 10 प्रतिशत की रेंज के भीतर होगी। इसके बाद 15 मिनट के कूलिंग-ऑफ पीरियड के बाद प्राइस बैंड को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक किया जा सकेगा।
वहीं, लिक्विड और ओवरनाइट ETF के लिए 5 प्रतिशत का फिक्स्ड प्राइस बैंड जारी रहेगा।
Gold और Silver ETF के लिए खास व्यवस्था
गोल्ड और सिल्वर ETF के लिए नए नियमों में विशेष व्यवस्था की गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने और चांदी की कीमतों में लगातार बदलाव को देखते हुए इन ETF की ट्रेडिंग अब सुबह 9:00 से 9:15 बजे तक प्री-ओपन कॉल ऑक्शन के जरिए शुरू होगी।
इस प्रक्रिया के तहत मांग और आपूर्ति के आधार पर शुरुआती कीमत तय की जाएगी। गोल्ड और सिल्वर ETF के लिए शुरुआती प्राइस बैंड 6 प्रतिशत रहेगा, जिसे विदेशी बाजारों में कीमतों की गतिविधि के अनुसार 3-3 प्रतिशत के चरणों में आगे बढ़ाया जा सकेगा।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
नए नियमों से लंबी अवधि के ETF निवेशकों पर सीधे तौर पर कोई बड़ा नकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद नहीं है। हालांकि, इंट्राडे और एक्टिव ट्रेडर्स को बाजार खुलने के शुरुआती समय में कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखना चाहिए।
विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसे समय में मार्केट ऑर्डर की बजाय लिमिट ऑर्डर का इस्तेमाल करना बेहतर हो सकता है, ताकि निवेशक अपनी तय कीमत से बहुत अलग स्तर पर खरीद या बिक्री होने के जोखिम को कम कर सकें।
