उत्तराखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: किच्छा और सिरौली कलां नगर पालिका चुनाव की मतगणना पर लगी रोक हटाई; कोर्ट ने कहा- जल्द शुरू कराएं काउंटिंग

नैनीताल उत्तराखंड हाईकोर्ट ने उधम सिंह नगर जिले की किच्छा और नवगठित सिरौली कलां नगर पालिका चुनाव की मतगणना को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसके तहत मतगणना को स्थगित रखा गया था। अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कहा कि जब मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो चुका है, तो फिर मतगणना क्यों रोकी गई है? खंडपीठ ने दोनों निकायों में मतगणना शीघ्र शुरू कराने के निर्देश दिए हैं।
प्रमुख बिंदु (Key Highlights):
- मतगणना पर लगी रोक हटी: हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सरकार व चुनाव आयोग के रोक संबंधी आदेश को निरस्त करते हुए तुरंत काउंटिंग के निर्देश दिए।
- अदालत की तल्ख टिप्पणी: कोर्ट ने सवाल किया- "जब चुनाव संपन्न हो चुका है, तो परिणाम घोषित करने में देरी क्यों?"
- 22 सितंबर को हुआ था मतदान: आयोग ने 22 सितंबर को वोटिंग कराई थी, लेकिन मतगणना अग्रिम आदेशों तक टाल दी थी।
- आरक्षण और सीमा विवाद: किच्छा व सिरौली कलां में सीमा विस्तार और अध्यक्ष पद के आरक्षण रोस्टर को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था।
हाईकोर्ट ने पूछा- चुनाव के बाद परिणाम रोकने का क्या औचित्य?
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति आलोक महरा की खंडपीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई। अदालत ने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत मतदान हो जाने के बाद परिणाम रोकना न्यायसंगत नहीं है। इसलिए निर्वाचन प्रक्रिया को पूरा करते हुए वोटों की गिनती तत्काल प्रभाव से शुरू की जाए।
एकलपीठ के बाद खंडपीठ पहुंची थी याचिकाकर्ता
दरअसल, किच्छा निवासी अलीना मलिक ने मतगणना रोकने के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इससे पहले एकलपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान राज्य निर्वाचन आयोग ने बताया था कि दोनों नगर पालिकाओं में 22 सितंबर को मतदान करा लिया जाएगा, लेकिन मतगणना को अग्रिम आदेश तक स्थगित रखा गया है।
उस समय एकलपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर तय की थी। इस बीच मतगणना रोके जाने के खिलाफ खंडपीठ में अपील की गई, जिस पर अदालत ने तुरंत संज्ञान लेते हुए मतगणना शुरू करने का आदेश पारित कर दिया।
क्या है पूरा विवाद?
किच्छा निवासी नईमुल हुसैन और अन्य लोगों ने हाईकोर्ट में जनहित याचिकाएं दायर कर पालिका चुनाव की प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे:
- आरक्षण रोस्टर पर आपत्ति: याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि सरकार ने प्रदेश की 43 नगर पालिकाओं के अध्यक्ष पदों के लिए आरक्षण की अधिसूचना जारी की, लेकिन इसमें किच्छा नगर पालिका अध्यक्ष पद के आरक्षण को शामिल नहीं किया गया। उनका आरोप था कि सरकार चुनाव टालने की मंशा से काम कर रही है।
- सीमा विस्तार का पेंच: पूर्व में सरकार ने किच्छा नगर पालिका में कुछ ग्रामीण क्षेत्रों और वार्डों को शामिल किया था, जिस पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी। बाद में सरकार ने इन्हें फिर से पालिका में शामिल किया, जिसके चलते आरक्षण और चुनाव को लेकर कानूनी विवाद खड़ा हुआ।
- सिरौली कलां का गठन: नवगठित सिरौली कलां नगर पालिका में भी चुनाव और आरक्षण को लेकर याचिकाएं लंबित थीं।
अब खंडपीठ के इस स्पष्ट आदेश के बाद दोनों नगर पालिकाओं के चुनावी नतीजों का रास्ता साफ हो गया है। चुनाव आयोग को अब जल्द ही मतगणना की नई तारीख तय कर परिणाम घोषित करने होंगे।
