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त्योहारों से पहले मिलावटखोरों पर FSSAI का हंटर: देशभर में 'एनालॉग' यानी नकली पनीर की बिक्री पर रोक की तैयारी; अब बिना दूध वाले प्रोडक्ट पर 'पनीर' लिखना होगा गैरकानूनी

24 September 2026
त्योहारों से पहले मिलावटखोरों पर FSSAI का हंटर: देशभर में 'एनालॉग' यानी नकली पनीर की बिक्री पर रोक की तैयारी; अब बिना दूध वाले प्रोडक्ट पर 'पनीर' लिखना होगा गैरकानूनी

नई दिल्ली :त्योहारी सीजन शुरू होने से ठीक पहले देश की शीर्ष खाद्य सुरक्षा नियामक संस्था FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण) ने नकली डेयरी उत्पादों के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है। FSSAI ने देशभर में 'एनालॉग पनीर' यानी वनस्पति तेल और स्टार्च से बनने वाले कृत्रिम (सिंथेटिक) पनीर के निर्माण और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का मसौदा (ड्राफ्ट नोटिफिकेशन) जारी किया है।

नए नियमों के लागू होने के बाद बिना दूध या नॉन-डेयरी फैट से तैयार किसी भी प्रोडक्ट के नाम, लेबल या विज्ञापन में 'पनीर' शब्द का इस्तेमाल करना पूरी तरह गैरकानूनी माना जाएगा।

प्रमुख बिंदु (Key Highlights):

  • 'एनालॉग पनीर' पर पाबंदी का ड्राफ्ट: वनस्पति तेल और स्टार्च से बनने वाले नकली पनीर के उत्पादन और बिक्री पर रोक लगाने की तैयारी।
  • 'पनीर' नाम के इस्तेमाल पर बैन: डेयरी लाइसेंस के तहत 'एनालॉग' उत्पाद बनाने वाली कंपनियां अब अपने प्रोडक्ट को 'पनीर' नहीं कह सकेंगी।
  • 60 दिनों में लागू हो सकता है नियम: जनता और स्टेकहोल्डर्स से सुझाव-आपत्तियां मांगने के लिए 60 दिन की विंडो खुली, इसके बाद पूरे देश में नियम प्रभावी होगा।
  • राज्यों के एक्शन के बाद केंद्र का कदम: महाराष्ट्र में लैब जांच में 35% से ज्यादा सैंपल फेल होने पर 1 साल का बैन लगा था; गुजरात में भी कड़े प्रतिबंध हैं।
  • त्योहारी सीजन पर अलर्ट: दूध, मावा, घी और पनीर में मिलावट रोकने के लिए सभी राज्यों को सघन जांच अभियान चलाने के निर्देश।

उपभोक्ताओं को धोखे से बचाने की बड़ी तैयारी

FSSAI के अनुसार, बाजार में बड़े पैमाने पर कंपनियों और स्थानीय डेयरी संचालकों द्वारा ग्राहकों को भ्रमित किया जा रहा था। असली दूध के फैट की जगह सस्ते पाम ऑयल/वेजिटेबल ऑयल, स्टार्च और केमिकल मिलाकर 'एनालॉग पनीर' तैयार किया जाता है और उसे असली पनीर के दाम पर बेचा जाता है।

FSSAI ने स्पष्ट किया है कि 'एनालॉग इन डेयरी कॉन्टेक्स्ट' कैटेगरी के तहत लाइसेंस रखने वाले कारोबारी अब पैकेजिंग पर 'पनीर' शब्द का उपयोग बिल्कुल नहीं कर पाएंगे, जिससे आम उपभोक्ता असली और नकली उत्पाद में फर्क समझ सकें।

महाराष्ट्र में 35% सैंपल हुए थे फेल, गुजरात ने भी कसी नकेल

केंद्र सरकार का यह ड्राफ्ट राज्यों द्वारा उठाए गए कड़े कदमों के बाद सामने आया है:

महाराष्ट्र: महाराष्ट्र एफडीए (FDA) ने हाल ही में राज्य में नकली पनीर पर एक साल का प्रतिबंध लगाया था। सरकारी लैब जांच में 35 प्रतिशत से ज्यादा पनीर के नमूने फेल पाए गए थे, जिनमें पशु फैट (मिल्क फैट) पूरी तरह गायब था और उसकी जगह वनस्पति तेल मिलाया गया था।

गुजरात: गुजरात सरकार ने भी उपभोक्ताओं की सेहत और दुग्ध उत्पादकों के हितों की रक्षा के लिए नकली पनीर, बटर और चीज के निर्माण व बिक्री पर कड़ी पाबंदी लगाई है।

60 दिन बाद देश भर में लागू होगा नया कानून

FSSAI ने इस ड्राफ्ट नोटिफिकेशन को सार्वजनिक कर 60 दिनों का समय दिया है। इस दौरान आम नागरिक, डेयरी उद्योग और कारोबारी अपनी राय व सुझाव दर्ज करा सकते हैं। आपत्तियों और सुझावों के निपटारे के बाद इसे अंतिम कानून के रूप में पूरे देश में अनिवार्य कर दिया जाएगा।

साथ ही, FSSAI ने सभी राज्यों के खाद्य सुरक्षा आयुक्तों को त्योहारी सीजन के मद्देनजर विशेष जांच दल गठित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि मिठाई, मावा और पनीर में मिलावट करने वाले माफियाओं पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सके।