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उत्तराखंड में जड़ी-बूटियों को मिलेगा नया बाजार, 47 हजार किसानों को बढ़ावा देने की तैयारी

24 September 2026
उत्तराखंड में जड़ी-बूटियों को मिलेगा नया बाजार, 47 हजार किसानों को बढ़ावा देने की तैयारी

देहरादून: उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मौजूद औषधीय जड़ी-बूटियों के बेहतर इस्तेमाल, संरक्षण और किसानों को प्रोत्साहित करने की दिशा में आयुष विभाग ने पहल शुरू कर दी है। प्रदेश में हजारों वनस्पतियां पाई जाती हैं, जिनमें करीब 2,300 वनस्पतियों का इस्तेमाल सदियों से औषधीय रूप में किया जा रहा है। अब इन प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग के साथ स्थानीय किसानों को इससे जोड़ने की रणनीति तैयार की जा रही है।

आयुष विभाग ने इस दिशा में एक प्रारंभिक खाका तैयार किया है। जल्द ही उद्यान विभाग, जड़ी-बूटी केंद्र और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर विस्तृत रोडमैप तैयार किया जाएगा। इसमें यह तय किया जाएगा कि जड़ी-बूटी और सगंध खेती करने वाले किसानों को किस तरह अधिक प्रोत्साहन दिया जा सकता है और इस पूरी प्रक्रिया में आयुष विभाग की क्या भूमिका होगी।

47 हजार किसान जड़ी-बूटी और सगंध खेती से जुड़े

उत्तराखंड को प्राकृतिक रूप से जड़ी-बूटियों का भंडार माना जाता है। वर्तमान में प्रदेश में करीब 47 हजार किसान जड़ी-बूटी और सगंध खेती से जुड़े हुए हैं। सरकार की ओर से भी इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं।

उत्तराखंड को आयुष प्रदेश बनाने की दिशा में 186 गांवों को जड़ी-बूटी ग्राम के रूप में चिन्हित किया गया है। इनमें से 13 गांव आयुष ग्राम बनने के लिए तैयार बताए गए हैं।

कई प्रजातियों पर बढ़ाई गई सब्सिडी

राज्य सरकार जड़ी-बूटी और सगंध प्रजातियों की खेती को बढ़ावा देने के लिए पहले ही सब्सिडी में बढ़ोतरी कर चुकी है। कुछ प्रजातियों पर अनुदान में ढाई से तीन गुना तक वृद्धि की गई है। अधिकतम अनुदान की सीमा एक लाख रुपये या दो हेक्टेयर क्षेत्रफल निर्धारित की गई है।

इसके अलावा तेजपत्ता, तिमूर और चंदन जैसी नई प्रजातियों को भी सब्सिडी के दायरे में शामिल किया गया है। ऐसे में आयुष विभाग अब यह तलाश रहा है कि इन योजनाओं को औषधीय उपयोग और बाजार की जरूरतों से किस तरह जोड़ा जाए।

संरक्षण और बेहतर इस्तेमाल पर रहेगा फोकस

प्रस्तावित रोडमैप में हिमालयी जड़ी-बूटियों के संरक्षण, उत्पादन, किसानों को प्रोत्साहन और बेहतर उपयोग पर विशेष जोर रहेगा। संबंधित विभागों के बीच समन्वय बढ़ाकर किसानों को जड़ी-बूटी आधारित खेती के लिए प्रोत्साहित करने और उपलब्ध संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग करने की योजना है।

आयुष विभाग की सचिव रंजना राजगुरु के मुताबिक, उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मौजूद जड़ी-बूटियों के बेहतर इस्तेमाल की दिशा में विभाग काम कर रहा है। अगले कुछ दिनों में आयुष विभाग, उद्यान विभाग और जड़ी-बूटी केंद्र के अधिकारियों के साथ बैठक कर आगे की रणनीति तैयार की जाएगी।

उन्होंने कहा कि फिलहाल आयुष विभाग की ओर से एक खाका तैयार किया गया है। बैठक में इस बात पर मुख्य रूप से चर्चा होगी कि प्रदेश के किसानों को विभाग किस तरह प्रोत्साहित कर रहा है और इस प्रक्रिया में आयुष विभाग की भूमिका क्या हो सकती है।