पीएम मोदी की अध्यक्षता में चिंतन शिविर संपन्न, ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य पर मंत्रियों ने किया मंथन

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रियों का दो दिवसीय चिंतन शिविर सेवा तीर्थ में संपन्न हुआ। शिविर में ‘विकसित भारत @ 2047’ के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए शासन में सुधार, कल्याणकारी योजनाओं की प्रभावी डिलीवरी, शिकायत निवारण और मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
चिंतन शिविर में प्रधानमंत्री ने मंत्रियों से सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन पर लगातार नजर रखने और जमीनी स्तर पर सक्रिय रहने पर जोर दिया। चर्चा में इस बात पर भी फोकस रहा कि कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक समय पर पहुंचे और क्रियान्वयन के दौरान सामने आने वाली कमियों को चिन्हित कर दूर किया जाए।
सूत्रों के मुताबिक, शिविर में सरकार की करीब 40 से 45 प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं की जमीनी पहुंच पर चर्चा हुई। मंत्रियों से योजनाओं के क्रियान्वयन में मौजूद कमियों की पहचान करने और उन्हें दूर करने के लिए उठाए गए कदमों की समीक्षा करने को कहा गया।
इस दौरान मंत्रियों को एक-एक पेज भी दिया गया, जिसमें उनसे पूछा गया कि उन्होंने अपने साथी मंत्री से क्या सीखा और उन्होंने खुद अपने सहयोगी को क्या सिखाया। इसका उद्देश्य अलग-अलग मंत्रालयों के अनुभवों और बेहतर कार्यप्रणालियों को साझा करना था।
सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री ने मंत्रियों से अपने मंत्रालय के अधिकारियों के साथ नियमित संवाद बनाए रखने को कहा। चर्चा के दौरान यह बात सामने आई कि कुछ मंत्री मुख्य रूप से सचिव स्तर के अधिकारियों के साथ ही संवाद करते हैं। ऐसे में प्रशासनिक ढांचे के अन्य अधिकारियों के साथ भी नियमित संपर्क रखने पर जोर दिया गया।
प्रधानमंत्री का संदेश था कि योजनाओं के क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति समझने के लिए मंत्रियों का पूरे प्रशासनिक तंत्र के साथ संवाद जरूरी है।
चिंतन शिविर के पहले दिन मंत्रियों को अलग-अलग समूहों में बांटकर विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई। प्रधानमंत्री ने स्वयं अलग-अलग टेबल पर जाकर चर्चाओं में हिस्सा लिया। इसमें गवर्नेंस, जन विश्वास, योजनाओं की समयबद्ध डिलीवरी, मंत्रालयों के बीच समन्वय और शिकायत निवारण जैसे मुद्दे शामिल रहे।
शिविर का उद्देश्य मौजूदा योजनाओं और कामकाज की समीक्षा के साथ-साथ आने वाले समय की प्राथमिकताएं तय करना और योजनाओं को जमीनी स्तर पर अधिक प्रभावी बनाने के उपायों पर विचार करना रहा।
सूत्रों के मुताबिक, चिंतन शिविर के अगले चरण की चर्चा 30 सितंबर और 1 अक्टूबर को प्रस्तावित है।
