त्योहारी सीजन में हवाई सफर नहीं होगा सस्ता;केंद्रीय मंत्री बोले- किराये पर कैप लगाना संभव नहीं

नई दिल्ली: आगामी त्योहारी सीजन में हवाई सफर करने की योजना बना रहे यात्रियों के लिए सरकार ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। नागर विमानन मंत्री के. राममोहन नायडू ने मंगलवार को कहा कि सरकार त्योहारी मांग के दौरान हवाई किराये पर किसी तरह की ऊपरी सीमा (प्राइस कैप) नहीं लगाएगी। हालांकि, सरकार ने एयरलाइन कंपनियों को सलाह दी है कि वे टिकटों के दाम उचित और व्यावहारिक स्तर पर रखें, ताकि यात्रियों की जेब पर अत्यधिक बोझ न पड़े।
केंद्रीय मंत्री नायडू ने यह बयान क्षेत्रीय हवाई संपर्क योजना 'उड़ान' (UDAN) के अगले चरण के समझौतों पर हस्ताक्षर के दौरान संवाददाताओं से बातचीत में दिया।
एयरलाइंस पर रखी जा रही है नजर: नायडू
विमानन मंत्री ने कहा कि सरकार त्योहारी सीजन और महत्वपूर्ण अवसरों पर हवाई किरायों के रुझान पर लगातार नजर बनाए रखती है। उन्होंने कहा, "हम एयरलाइन कंपनियों के साथ नियमित संपर्क में हैं और बैठकें कर रहे हैं। हमने उनसे अपील की है कि त्योहारों के समय टिकटों के दाम वाजिब रखे जाएं, ताकि घर जाने वाले आम लोगों को इसका सीधा लाभ मिल सके।"
पश्चिम एशिया संकट और एटीएफ की बढ़ी कीमतें
हवाई किराये में बढ़ोतरी की वजह बताते हुए मंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के चलते विमान ईंधन (ATF) की कीमतों में तेजी आई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विमान ईंधन किसी भी एयरलाइन के परिचालन खर्च का लगभग 40 से 43 प्रतिशत हिस्सा होता है। ऐसे में एटीएफ की कीमतों में थोड़ी सी भी वृद्धि का सीधा असर टिकट दरों पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि टिकटों की मौजूदा कीमतों के पीछे केवल त्योहारी मांग ही नहीं, बल्कि वैश्विक संकट भी एक बड़ा कारण है।
त्योहारों पर दोगुने से तीन गुना तक पहुंचे टिकट के दाम
त्योहारी मांग के चलते प्रमुख रूटों पर हवाई किराये पहले ही आसमान छूने लगे हैं:
- हैदराबाद से पटना: सामान्य दिनों में इस रूट का किराया ₹5,000 से ₹6,000 के आसपास रहता है, लेकिन दिवाली और छठ के दौरान यह बढ़कर ₹15,000 के पार पहुंच गया है।
- दिल्ली से पटना: आम दिनों में ₹5,000 से ₹6,000 रहने वाला किराया आगामी त्योहारी सीजन में दोगुने से भी अधिक हो चुका है।
ईंधन कीमतों को स्थिर रखने की सरकारी पहल
उल्लेखनीय है कि मध्य पूर्व संकट के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में जेट फ्यूल की दरों में आए उतार-चढ़ाव को संतुलित करने के लिए सरकार ने पहले भी कदम उठाए हैं। जून माह में केंद्रीय कैबिनेट ने तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के लिए ₹10,000 करोड़ के प्राइस स्टेबिलाइजेशन फंड को मंजूरी दी थी, ताकि तीन साल तक एटीएफ की कीमतों में स्थिरता लाई जा सके।
इसके बावजूद, ईंधन लागत बढ़ने के चलते हाल के महीनों में एयरलाइंस ने फ्यूल सरचार्ज में संशोधन किया है; जिसमें इंडिगो द्वारा दूरी-आधारित सरचार्ज (₹275 से ₹950) लागू करना और एयर इंडिया द्वारा घरेलू व अंतरराष्ट्रीय रूटों पर सरचार्ज बढ़ाना शामिल है।
