जूडो से एमएमए तक सुचिका तरियाल का सफर: आठ बार की राष्ट्रीय चैंपियन ने एशियाई मंच पर दिलाया कांस्य

रोहतक: हरियाणा के रोहतक से निकलीं सुचिका तरियाल ने मिश्रित मार्शल आर्ट में भारत के लिए कांस्य पदक जीतकर एक नया अध्याय जोड़ दिया है। जूडो की चटाई से शुरू हुआ उनका सफर जिउ-जित्सु से होते हुए एमएमए के मंच तक पहुंचा है, और हर पड़ाव पर उन्होंने पदक जीते हैं।
सुचिका ने 12 साल की उम्र में जूडो सीखना शुरू किया था। इसके बाद वह आठ बार राष्ट्रीय जूडो चैंपियन बनीं और 20 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में देश का प्रतिनिधित्व किया। वर्ष 2019 की राष्ट्रमंडल जूडो चैंपियनशिप और दक्षिण एशियाई खेलों में उन्होंने स्वर्ण पदक जीता, जबकि 2018 की राष्ट्रमंडल स्पर्धा में उनके हिस्से रजत आया था।
सात साल के अंतराल के बाद वापसी
एमएमए में उनकी शुरुआत 2017 में हुई थी, लेकिन इसके बाद करीब सात साल का लंबा अंतराल आ गया। नवंबर 2024 में उन्होंने एक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता मंच के साथ अनुबंध किया और दिसंबर 2024 में बहरीन में हुए मुकाबले में जीत के साथ वापसी की। इसके बाद जनवरी और मई 2026 में एशियाई एमएमए चैंपियनशिप में उन्होंने कांस्य पदक जीते।
- जूडो: आठ बार राष्ट्रीय चैंपियन, 20 से अधिक अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाएं
- जिउ-जित्सु: 2024 की विश्व चैंपियनशिप में 63 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण
- कुराश: 2022 के एशियाई खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व
- एमएमए: एशियाई चैंपियनशिप में दो कांस्य और अब एशियाई खेलों में पदक
जूडो की नींव आई काम
सुचिका कहती हैं कि जूडो ने उन्हें एमएमए के लिए तैयार किया। पकड़, संतुलन और विरोधी को गिराने की तकनीक जूडो से आई, जिसे बाद में जिउ-जित्सु की जमीनी लड़ाई और एमएमए की मुक्केबाजी तथा किक से जोड़ना पड़ा। मुंबई की एक अकादमी में कोच निखिल कुंदर के साथ उन्होंने यही तालमेल बैठाने पर काम किया।
उनके पति कपिल हुड्डा भी खेल से जुड़े रहे हैं और तैयारी के दौरान परिवार का सहयोग उन्हें लगातार मिला। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की ओर से भी उन्हें उनके प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया जा चुका है।
खेल के बाहर भी सुचिका की पहचान बनी है। वह एक चर्चित रियलिटी कार्यक्रम और एक डिजिटल मंच की खेल आधारित शृंखला में नजर आ चुकी हैं, जिससे युवाओं के बीच मार्शल आर्ट को लेकर दिलचस्पी बढ़ी है। कोचों का कहना है कि उनकी सफलता से हरियाणा और आसपास के राज्यों की लड़कियों के लिए एक नया रास्ता खुला है।
