इसरो का स्वदेशी पर जोर: बेयरिंग से लेकर सौर पैनल तक, पांच अहम उपकरण देश में ही बनाने की तैयारी

बेंगलुरु: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने अपने रॉकेट और उपग्रहों में लगने वाले कई अहम उपकरण देश में ही तैयार कराने की दिशा में कदम बढ़ाया है। संगठन के अलग-अलग केंद्रों ने पांच प्रमुख उपकरणों और प्रणालियों के स्वदेशी विकास के लिए निविदाएं जारी की हैं। इनमें से एक निविदा में विदेशी निर्माताओं और उनके प्रतिनिधियों को बोली लगाने से बाहर रखा गया है।
पहली निविदा रॉड-एंड बेयरिंग के स्वदेशी विकास के लिए विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र की ओर से जारी हुई है। ये बेयरिंग रॉकेट के नियंत्रण तंत्र में इस्तेमाल होते हैं और इन पर भारी दबाव तथा कंपन का असर पड़ता है। इसी निविदा में विदेशी मूल उपकरण निर्माताओं की भागीदारी पर रोक रखी गई है, ताकि घरेलू उद्योग को अवसर मिल सके।
कौन सा केंद्र क्या बनवा रहा है
- रॉड-एंड बेयरिंग: विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र
- कंपन परीक्षण ढांचा: यू आर राव उपग्रह केंद्र
- अक्षीय प्रणोद मापन प्रणाली: सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र
- एक्स बैंड उपकरण: अंतरिक्ष संचार केंद्र के लिए सिमुलेशन अप-कन्वर्टर और एक्साइटर
- सौर पैनल: उड़ान के लिए तैयार पैनलों का निर्माण और परीक्षण, यू आर राव उपग्रह केंद्र
स्वदेशी विकास क्यों अहम
अंतरिक्ष कार्यक्रम में इस्तेमाल होने वाले कई उपकरण बेहद विशिष्ट होते हैं और उनकी आपूर्ति गिने-चुने देशों से होती है। ऐसे उपकरणों के लिए बाहरी आपूर्ति पर निर्भरता से लागत बढ़ती है और कई बार मिशन की समयसीमा भी प्रभावित होती है। देश में ही निर्माण होने पर न सिर्फ खर्च घटता है, बल्कि जरूरत के मुताबिक बदलाव कराना भी आसान हो जाता है।
इन निविदाओं का एक बड़ा फायदा घरेलू छोटे और मझोले उद्योगों को मिलने की उम्मीद है। बीते वर्षों में देश की कई निजी कंपनियां रॉकेट के पुर्जे, उपग्रह उपप्रणालियां और परीक्षण उपकरण बनाने लगी हैं। अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोले जाने के बाद ऐसी कंपनियों की संख्या लगातार बढ़ी है।
सौर पैनल उपग्रहों के लिए बिजली का मुख्य स्रोत होते हैं, जबकि कंपन परीक्षण ढांचा यह जांचने के काम आता है कि प्रक्षेपण के समय होने वाले भारी कंपन को उपकरण झेल पाएंगे या नहीं। अक्षीय प्रणोद मापन प्रणाली इंजन के परीक्षण के दौरान बल मापने में इस्तेमाल होती है।
अंतरिक्ष संचार केंद्र के लिए मांगे गए एक्स बैंड उपकरण जमीन से उपग्रहों तक संकेत भेजने और परीक्षण करने में काम आते हैं। इन सभी उपकरणों का देश में बनना आने वाले मिशनों की तैयारी को तेज करेगा।
