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वेतन की नई परिभाषा लागू: भत्तों की आधी सीमा तय, लाखों कर्मचारी आएंगे बीमा के दायरे में

21 September 2026
वेतन की नई परिभाषा लागू: भत्तों की आधी सीमा तय, लाखों कर्मचारी आएंगे बीमा के दायरे में

नई दिल्ली: सामाजिक सुरक्षा संहिता के तहत वेतन की नई परिभाषा लागू होने से लाखों कर्मचारियों को स्वास्थ्य बीमा और दूसरी सुविधाओं का लाभ मिलने का रास्ता खुला है। नई व्यवस्था में भत्तों की एक तय सीमा से ऊपर की राशि को वेतन में जोड़ा जाएगा, जिससे कई ऐसे कर्मचारी दायरे में आ जाएंगे जो अब तक बाहर थे।

संहिता की धारा 2 की उपधारा 88 में वेतन की यह नई परिभाषा दी गई है। इसके अनुसार यदि वेतन से बाहर रखे गए भत्तों की कुल राशि कुल पारिश्रमिक के 50 प्रतिशत से अधिक होती है, तो अतिरिक्त राशि को वापस वेतन में जोड़ दिया जाएगा। यह प्रावधान 21 नवंबर 2025 से प्रभाव में आया और राजपत्र में प्रकाशन की तारीख 8 मई 2026 से लागू माना गया है।

एक उदाहरण से समझें

कर्मचारी राज्य बीमा निगम के महानिदेशक अशोक कुमार सिंह ने इसे एक सरल उदाहरण से समझाया है। मान लीजिए किसी कर्मचारी का कुल पारिश्रमिक 20 हजार रुपये है, जिसमें मूल वेतन 8 हजार रुपये और भत्ते 12 हजार रुपये हैं। कुल राशि का आधा यानी 10 हजार रुपये तक ही भत्ते बाहर रखे जा सकते हैं, इसलिए शेष 2 हजार रुपये वेतन में जोड़ दिए जाएंगे और वेतन 10 हजार रुपये माना जाएगा।

  • नियम: भत्ते कुल पारिश्रमिक के 50 प्रतिशत से ऊपर नहीं रखे जा सकते
  • असर: अतिरिक्त भत्ता राशि वेतन में जुड़ेगी
  • प्रभावी तिथि: प्रावधान 21 नवंबर 2025 से प्रभाव में, राजपत्र की तारीख 8 मई 2026

कर्मचारियों को क्या मिलेगा

वेतन की गणना बदलने से बीमा योजना की पात्रता तय करने का आधार भी बदल जाएगा। इससे ऐसे बहुत से कर्मचारी योजना के दायरे में आ जाएंगे जिनका मूल वेतन कम और भत्ते अधिक दिखाए जाते थे। योजना के तहत बीमित कर्मचारी और उनके परिजन अस्पतालों में इलाज, दवा, जांच और भर्ती की सुविधा का लाभ ले सकते हैं।

इसके अलावा बीमारी के दौरान नकद सहायता, मातृत्व लाभ और काम के दौरान चोट लगने पर सहायता जैसी सुविधाएं भी योजना का हिस्सा हैं। संगठित क्षेत्र में काम करने वाले कम आय वर्ग के कर्मचारियों के लिए यह एक बड़ा सहारा माना जाता है।

जानकारों का कहना है कि वेतन की एक समान परिभाषा तय होने से नियोक्ताओं के लिए हिसाब-किताब भी स्पष्ट हो जाएगा। अलग-अलग कानूनों में वेतन की अलग व्याख्या होने से पहले भ्रम की स्थिति बनती थी, जिसे नई संहिता दूर करने की कोशिश करती है।