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सादगी की मिसाल: जापान के पूर्व प्रधानमंत्री 40 साल से रोज सुबह स्टेशन पर बांटते हैं अपने पर्चे

20 September 2026
सादगी की मिसाल: जापान के पूर्व प्रधानमंत्री 40 साल से रोज सुबह स्टेशन पर बांटते हैं अपने पर्चे

टोक्यो: लोकतंत्र में जब कोई नेता देश के सर्वोच्च पद तक पहुंच जाता है, तो आमतौर पर सुरक्षा घेरा, बड़े काफिले और भव्य आयोजन उसकी पहचान बन जाते हैं। लेकिन जापान के पूर्व प्रधानमंत्री योशिहिको नोदा की कहानी इससे एकदम अलग है। देश के प्रधानमंत्री रह चुके नोदा पिछले करीब चार दशकों से एक साधारण स्थानीय नेता की तरह रोज सुबह रेलवे स्टेशन के बाहर खड़े होकर यात्रियों को राजनीतिक पर्चे और न्यूजलेटर बांटते हैं।

हाल ही में 18 सितंबर को योशिहिको नोदा को चिबा के मिनामी-फुनाबाशी रेलवे स्टेशन पर सुबह की व्यस्त आवाजाही के दौरान देखा गया। उनके आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार वह सुबह 6:30 बजे से 8:30 बजे तक स्टेशन के प्रवेश द्वार पर मौजूद रहे। इस दौरान उन्होंने कोई भाषण नहीं दिया, बल्कि सीधे यात्रियों के हाथ में पर्चे थमाए।

प्रधानमंत्री बनने पर भी नहीं टूटा यह सिलसिला

नोदा 1987 में चिबा प्रांतीय विधानसभा के सदस्य चुने गए थे। इसके बाद 1993 में वह जापान के निचले सदन में पहुंचे। वर्ष 2011 और 2012 के बीच वित्त मंत्री रहने के बाद सितंबर 2011 से दिसंबर 2012 तक वह जापान के प्रधानमंत्री पद पर रहे। जापान के सबसे शक्तिशाली राजनीतिक पद पर पहुंचने और बाद में पद छोड़ने के बावजूद उन्होंने अपनी इस आदत को कभी नहीं बदला।

रोज सुबह दो घंटे स्टेशन के गेट पर

स्टेशन पर मौजूद रहने का उनका यह क्रम किसी चुनावी मौसम तक सीमित नहीं है। सुबह दफ्तर जाने वालों की भीड़ के बीच खड़े होकर वह अपने क्षेत्र के लोगों को अपने कामकाज का ब्योरा देने वाले पर्चे देते हैं। यात्रियों के लिए यह दृश्य अब इतना सामान्य हो चुका है कि कई लोग बिना रुके ही पर्चा लेकर आगे बढ़ जाते हैं।

उनके राजनीतिक सफर की अहम तारीखें

  • 1987: चिबा प्रांतीय विधानसभा के सदस्य चुने गए।
  • 1993: जापान के निचले सदन में पहली बार पहुंचे।
  • 2011-2012: वित्त मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली।
  • सितंबर 2011 से दिसंबर 2012: जापान के प्रधानमंत्री पद पर रहे।

राजनीति में सादगी की मिसाल के तौर पर उनकी यह आदत अक्सर चर्चा में आती रही है। ऊंचे पद तक पहुंचने के बाद भी अपने मतदाताओं तक सीधे पहुंचने का यह तरीका उन्होंने चार दशकों से नहीं छोड़ा, और यही बात उन्हें जापान की राजनीति में अलग पहचान देती है।