यूपी के दो युवा शंघाई में दिखाएंगे हुनर, कार पेंटिंग और हाईराइज निर्माण में मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के दो युवाओं का हुनर अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर परखा जाएगा। लखनऊ के इंदिरानगर निवासी कैफ और लखीमपुर खीरी के देवीपुरवा निवासी रुद्र प्रताप का चयन शंघाई में होने वाली अंतरराष्ट्रीय कौशल प्रतियोगिता के लिए हुआ है। कैफ वहां कार पेंटिंग में अपनी दक्षता दिखाएंगे, जबकि रुद्र प्रताप ऊंची इमारतों के निर्माण से जुड़े वर्ग में प्रदेश का प्रतिनिधित्व करेंगे।
सैंडिंग और क्लीनिंग से पैनल को नया बना देते हैं कैफ
कैफ ठेकेदार मोहम्मद फहीम के बेटे हैं। हाईस्कूल के बाद उन्होंने एक निजी कार कंपनी की वर्कशॉप में काम शुरू किया था। वाहन पर खरोंच आने के बाद पूरे पैनल को दोबारा रंगने के बजाय सैंडिंग और क्लीनिंग के जरिये उसे नए जैसा बना देना उनकी विशेषज्ञता है। वह स्केच कलरिंग के नौ मॉड्यूल भी जानते हैं। कंपनी ने लगातार प्रशिक्षण देकर उनके कौशल को और निखारा। कैफ ने तय किया है कि शंघाई से लौटने के बाद वह आईटीआई से स्किल कोर्स भी करेंगे।
सटीकता ही है रुद्र प्रताप की सबसे बड़ी ताकत
लखीमपुर खीरी के देवीपुरवा निवासी किसान रमेश चंद्र श्रीवास्तव के बेटे रुद्र प्रताप ने बीएससी करने के बाद सिविल में डिप्लोमा किया। इसके बाद वह एक कंपनी से जुड़कर अपने क्षेत्र में दक्षता हासिल करते गए। रुद्र का कहना है कि ऊंची इमारतों के निर्माण के दौरान बेहद सटीकता जरूरी होती है, क्योंकि मामूली चूक भी बड़ी गड़बड़ी की वजह बन सकती है। इंडिया स्किल्स के जरिये आवेदन करने के बाद वह कई चरणों से गुजरते हुए अंतिम सूची तक पहुंचे।
पदक जीतने पर दस लाख रुपये तक की पुरस्कार राशि
- स्वर्ण पदक: विजेता को दस लाख रुपये तक की पुरस्कार राशि दी जाती है।
- रजत पदक: दूसरे स्थान पर रहने वाले प्रतिभागी को आठ लाख रुपये तक मिलते हैं।
- कांस्य पदक: तीसरे स्थान पर रहने वाले प्रतिभागी को छह लाख रुपये तक की राशि दी जाती है।
- एक्सीलेंस अवार्ड: इसके तहत दो लाख रुपये दिए जाते हैं, वहीं प्रशिक्षण देने वाले विशेषज्ञों को दो से तीन लाख रुपये तक की राशि मिलती है।
उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के मिशन निदेशक पुलकित खरे ने कहा कि वैश्विक मंच पर प्रदेश के युवाओं का प्रतिनिधित्व करना गर्व की बात है। उन्होंने प्रदेश के दूसरे युवाओं से भी अपील की कि वे अपने कौशल को बड़े मंच तक ले जाने के लिए इंडिया स्किल्स कॉम्पीटिशन 2026-27 में जरूर हिस्सा लें। इसके लिए 22 सितंबर तक पंजीकरण का अवसर है।
खरे के मुताबिक हुनर ही पहचान बनता है और यही पहचान युवाओं को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचा सकती है। दोनों चयनित युवाओं का कहना है कि तकनीकी काम को अब सम्मान की नजर से देखा जाने लगा है और यही बदलाव नई पीढ़ी को इस दिशा में आगे बढ़ने का हौसला दे रहा है।
