नासा ने सराहा इसरो का सामर्थ्य, वरिष्ठ अधिकारी बोले- साझेदारी को और विस्तार देने के लिए उत्सुक हैं

न्यूयॉर्क: अमेरिकी अंतरिक्ष संस्था नासा और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो के बीच की साझेदारी बेहद शानदार है और नासा भारत के साथ सहयोग को और अधिक विस्तार देने के लिए उत्सुक है। यह बात नासा के भारतीय-अमेरिकी वरिष्ठ अधिकारी अमित क्षत्रिय ने कही। नासा के एसोसिएट एडमिनिस्ट्रेटर और चीफ इंजीनियर क्षत्रिय ने एक बातचीत में कहा कि विज्ञान मिशन और मानव अंतरिक्ष उड़ान, दोनों ही क्षेत्रों में इसरो जो क्षमता विकसित कर रहा है, उसे देखना वाकई अद्भुत है।
निसार मिशन का विशेष तौर पर जिक्र
अमित क्षत्रिय ने निसार मिशन का विशेष तौर पर उल्लेख किया। यह नासा और इसरो का संयुक्त अर्थ-सेंसिंग ऑर्बिटर प्रोजेक्ट है, जिसे पृथ्वी की जमीन, बर्फ, पानी और पेड़-पौधों में हो रहे बदलावों को समझने के लिए जुलाई 2025 में प्रक्षेपित किया गया था। उन्होंने बताया कि इस संयुक्त प्रयास से दोनों पक्षों को काफी फायदा हुआ है। मानव अंतरिक्ष मिशनों में भी नासा अपने अनुभव इसरो के साथ साझा करता है।
भारत के 70 से अधिक अन्य देशों के साथ आर्टेमिस समझौते पर हस्ताक्षर करने का जिक्र करते हुए क्षत्रिय ने कहा कि यह इस बात की प्रतिबद्धता है कि दोनों देश लोकतांत्रिक मूल्यों और एक-दूसरे की अखंडता का सम्मान करते हुए अंतरिक्ष खोज को आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने इसरो को एक अविश्वसनीय साझेदार बताया।
इंट्रेपिड म्यूजियम में हुई चर्चा
अमित क्षत्रिय न्यूयॉर्क के प्रसिद्ध इंट्रेपिड म्यूजियम में एंटरप्राइज के 50 साल पूरे होने पर आयोजित एक चर्चा में भाग लेने पहुंचे थे। इस कार्यक्रम में उनके साथ पूर्व नासा प्रमुख और अंतरिक्ष यात्री चार्ल्स एफ. बोल्डन जूनियर तथा एक्सिओम स्पेस की डायरेक्टर पेगी व्हिटसन भी मौजूद थीं।
पेगी व्हिटसन ने एक्सिओम मिशन 4 में ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला के साथ काम करने का अनुभव साझा किया। उन्होंने कहा कि शुभांशु शुक्ला का इस मिशन में पायलट होना उनके लिए बेहद खुशी की बात थी और उन्हें उन पर गर्व है। लखनऊ में जन्मे भारतीय वायुसेना के पायलट शुभांशु शुक्ला अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन जाने वाले पहले भारतीय बने। वह विंग कमांडर राकेश शर्मा के बाद अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय हैं।
जून 2025 में प्रक्षेपित हुए इस 18 दिवसीय मिशन में कमांडर व्हिटसन और पायलट शुक्ला के अलावा पोलैंड के स्वावोज उज्नान्स्की-विश्नेव्स्की और हंगरी के तिबोर कापू शामिल थे। पेगी व्हिटसन अंतरिक्ष में कुल 695 दिन बिताने वाली दुनिया की सबसे अनुभवी महिला अंतरिक्ष यात्री हैं।
पहले ही प्रयास में मंगल तक पहुंचा था भारत
पूर्व नासा प्रमुख चार्ल्स एफ. बोल्डन ने भारत की तारीफ करते हुए कहा कि अपने पहले ही प्रयास में मंगल ग्रह तक पहुंचने वाला भारत दुनिया का पहला देश था। भारत ने नवंबर 2013 में मंगलयान प्रक्षेपित किया था और इसरो मंगल की कक्षा में पहुंचने वाली दुनिया की चौथी अंतरिक्ष संस्था बनी थी। बोल्डन ने बताया कि इस मिशन के दौरान नासा के डीप स्पेस नेटवर्क ने बेंगलुरु स्थित भारतीय डीप स्पेस नेटवर्क को नेविगेशन और ट्रैकिंग में सहयोग दिया था।
