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दुनिया में स्वास्थ्यकर्मियों की संख्या सात करोड़ पार, दो दशक में उपलब्धता 52 प्रतिशत बढ़ी

19 September 2026
दुनिया में स्वास्थ्यकर्मियों की संख्या सात करोड़ पार, दो दशक में उपलब्धता 52 प्रतिशत बढ़ी

जिनेवा: दुनिया में डॉक्टर, नर्स और दूसरे स्वास्थ्यकर्मियों की संख्या पिछले दो दशकों में तेजी से बढ़ी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की नई रिपोर्ट के मुताबिक स्वास्थ्य और देखभाल क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की संख्या अब सात करोड़ से अधिक हो चुकी है, जबकि प्रति आबादी उनकी उपलब्धता में करीब 52 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रिपोर्ट का नाम नेशनल हेल्थ वर्कफोर्स एकाउंट्स: हेल्थ वर्कफोर्स लेवल्स एंड ट्रेंड्स 2026 है।

आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2006 में दुनिया में प्रति दस हजार आबादी पर औसतन 44.8 स्वास्थ्यकर्मी थे। वर्ष 2025 तक यह संख्या बढ़कर 67.9 हो गई। इस गणना में डॉक्टर, नर्स, दाई, दंत चिकित्सक और फार्मासिस्ट जैसे पेशेवर शामिल किए गए हैं। यह बदलाव बताता है कि बीते दो दशकों में वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था ने मानव संसाधन के स्तर पर बड़ा विस्तार किया है।

आंकड़ों की निगरानी में बड़ी प्रगति

रिपोर्ट का एक उत्साहजनक पहलू आंकड़ों की गुणवत्ता में सुधार है। वर्ष 2025 में 90 प्रतिशत से अधिक सदस्य देशों ने अपने स्वास्थ्यकर्मियों से जुड़े आंकड़े साझा किए। पिछले वर्षों की तुलना में आंकड़ों के संग्रह और उपलब्धता में करीब 20 गुना सुधार हुआ है, जिससे देशों के बीच तुलना करना और भविष्य की जरूरतों का अनुमान लगाना आसान होगा।

क्षेत्रों के बीच अब भी बड़ा अंतर

  • डॉक्टरों का घनत्व: यूरोपीय क्षेत्र में डॉक्टरों की उपलब्धता अफ्रीकी क्षेत्र की तुलना में करीब 13 गुना अधिक है।
  • नर्स और दाइयां: इनकी उपलब्धता के मामले में यह अंतर करीब छह गुना का है।
  • आर्थिक स्थिति से संबंध: जिन देशों के पास स्वास्थ्य शिक्षा और प्रशिक्षण के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं, वहां कमी दूर करना कठिन है।

उम्रदराज होता कार्यबल

रिपोर्ट में एक और अहम बात यह उभरकर आई है कि दुनिया में करीब हर चार में से एक डॉक्टर की उम्र 55 वर्ष से अधिक है। उच्च आय वाले देशों में यह अनुपात और ऊंचा है, जहां करीब हर तीन में से एक डॉक्टर इस आयु वर्ग में है। इसका अर्थ यह नहीं कि ये सभी तुरंत सेवानिवृत्त हो जाएंगे, लेकिन आने वाले वर्षों में अनुभवी चिकित्सकों की बड़ी संख्या कार्यबल से बाहर हो सकती है।

मौजूदा रुझानों के आधार पर रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि 2030 तक दुनिया में करीब 1.11 करोड़ स्वास्थ्यकर्मियों की कमी रह सकती है और 67 देशों के सामने अपनी आबादी की बुनियादी स्वास्थ्य जरूरतें पूरी करने की चुनौती बनी रह सकती है।

संगठन का संदेश साफ है कि स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत करने का मतलब केवल नए अस्पताल या उपकरण खड़े करना नहीं है। डॉक्टर, नर्स, दाई और तकनीकी कर्मचारी किसी भी स्वास्थ्य प्रणाली की रीढ़ हैं, इसलिए देशों को उनकी शिक्षा, प्रशिक्षण, भर्ती और कामकाजी परिस्थितियों में निवेश बढ़ाने की जरूरत होगी।