बदरीनाथ धाम में देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव-2026 का भव्य शुभारंभ, लोक संस्कृति और सेना की प्रदर्शनी बनी आकर्षण

चमोली: बदरीनाथ धाम के टूरिस्ट अराइवल प्लाजा में शनिवार को देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव-2026 का भव्य शुभारंभ हुआ। भारतीय सेना और जिला प्रशासन चमोली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह दो दिवसीय महोत्सव ‘हमारी विरासत, हमारा भविष्य’ थीम पर आधारित है। आयोजन में श्रद्धालुओं, पर्यटकों, स्थानीय नागरिकों, विद्यार्थियों, कलाकारों, महिला स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय उद्यमियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
महोत्सव के पहले दिन उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, कला और परंपराओं की शानदार झलक देखने को मिली। गढ़वाली लोकगीत, लोकनृत्य, पांडव नृत्य और छोलिया नृत्य के साथ पारंपरिक वाद्य यंत्रों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के जरिए देवभूमि की सांस्कृतिक विविधता और हिमालयी जीवनशैली को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।
स्थानीय उत्पादों और पहाड़ी व्यंजनों ने खींचा ध्यान
महोत्सव परिसर में लगाए गए विभिन्न स्टॉल भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे। यहां हस्तशिल्प, हथकरघा, ऊनी वस्त्र, जैविक उत्पाद, पारंपरिक आभूषण, स्थानीय मसाले, जड़ी-बूटी उत्पाद और लकड़ी से निर्मित सामग्री प्रदर्शित की गई। इसके अलावा पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों का भी लोगों ने स्वाद लिया।
महिला स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय उद्यमियों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों को आगंतुकों ने खूब सराहा। आयोजन के जरिए स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्वरोजगार और आर्थिक सशक्तीकरण को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया।
सेना की प्रदर्शनी बनी प्रमुख आकर्षण
महोत्सव में भारतीय सेना की विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई है। विद्यार्थियों और युवाओं ने सेना के आधुनिक उपकरणों, सीमावर्ती क्षेत्रों में सैनिकों के जीवन, आपदा राहत एवं जनसेवा कार्यों तथा राष्ट्र निर्माण में सेना की भूमिका से जुड़ी जानकारी हासिल की।
इस प्रदर्शनी के माध्यम से युवाओं को सीमांत क्षेत्रों में भारतीय सेना की भूमिका को करीब से समझने का अवसर मिला।
युवाओं ने भी बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा
विद्यालयों और महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी की। महोत्सव ने युवाओं को अपनी लोक परंपराओं, कला और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के साथ ही अपनी संस्कृति के प्रति गर्व की भावना को मजबूत करने का अवसर दिया।
धार्मिक पर्यटन के साथ सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा
देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव को धार्मिक पर्यटन के साथ सांस्कृतिक और सीमा पर्यटन को जोड़ने की पहल के तौर पर देखा जा रहा है। बदरीनाथ धाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को उत्तराखंड की स्थानीय संस्कृति, कला, खान-पान और पारंपरिक उत्पादों को करीब से जानने का अवसर मिल रहा है।
आयोजकों के अनुसार, ऐसे आयोजनों से स्थानीय बाजार के साथ-साथ होटल, होमस्टे, परिवहन, भोजनालय और अन्य स्थानीय व्यवसायों को भी अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलने की संभावनाएं बढ़ती हैं। दो दिवसीय यह महोत्सव उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को देश-दुनिया से आने वाले पर्यटकों तक पहुंचाने का मंच बन रहा है।
