एशियाई खेलों का भव्य आगाज, मनु भाकर और पवन सहरावत के हाथों में तिरंगा

नागोया: बीसवें एशियाई खेलों की औपचारिक शुरुआत शानदार उद्घाटन समारोह के साथ हो गई। आइची और नागोया के पालोमा मिजुहो स्टेडियम में हुए इस रंगारंग समारोह में 45 देशों और क्षेत्रों के खिलाड़ी तथा अधिकारी शामिल हुए। जापान के सम्राट नारुहितो ने खेलों के आधिकारिक रूप से शुरू होने की घोषणा की और इसके साथ ही महाद्वीप के सबसे बड़े खेल आयोजन का पर्दा उठ गया।
भारतीय दल का नेतृत्व निशानेबाज मनु भाकर और कबड्डी खिलाड़ी पवन सहरावत ने किया। दोनों ने तिरंगा थामकर दल की अगुवाई की और स्टेडियम में मौजूद दर्शकों ने भारतीय खिलाड़ियों का जोरदार स्वागत किया।
दोनों ध्वजवाहकों का अनुभव
- मनु भाकर: यह उनका तीसरा एशियाई खेल है और वह पेरिस ओलंपिक में दो पदक जीत चुकी हैं।
- पवन सहरावत: वह हांगझोऊ 2023 में स्वर्ण जीतने वाली भारतीय कबड्डी टीम का हिस्सा रहे हैं।
- अंतिम समय में बदलाव: गोला फेंक खिलाड़ी तजिंदरपाल सिंह तूर को पहले पुरुष ध्वजवाहक चुना गया था, लेकिन समारोह की पोशाक से जुड़ी तकनीकी दिक्कत के कारण अंतिम समय में यह जिम्मेदारी बदल दी गई।
तूर इस बदलाव के बावजूद भारतीय दल की अहम पदक उम्मीदों में शामिल हैं और गोला फेंक स्पर्धा में उनसे बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है।
जापानी परंपरा की झलक
समारोह की शुरुआत जापान की पारंपरिक संगीत और नृत्य प्रस्तुतियों से हुई, जिनमें मेजबान देश की संस्कृति की झलक दिखाई दी। आइची प्रांत के गवर्नर ओमुरा हिदेआकी ने स्टेडियम में मौजूद लोगों को जापानी में संबोधित किया। एशियाई ओलंपिक परिषद के अध्यक्ष शेख जोआन बिन हमद अल थानी ने भी सभा को संबोधित किया।
पिछले प्रदर्शन से बड़ी उम्मीदें
भारतीय खेमे के लिए यह आयोजन खास अहमियत रखता है, क्योंकि हांगझोऊ 2023 में भारत ने अब तक का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए कुल 107 पदक जीते थे। इनमें 28 स्वर्ण, 38 रजत और 41 कांस्य पदक शामिल थे। इस बार खिलाड़ियों और प्रशंसकों दोनों की निगाहें उस आंकड़े को और बेहतर करने पर टिकी हैं।
उद्घाटन समारोह के बाद अब अलग-अलग स्पर्धाओं में मुकाबले शुरू होंगे। निशानेबाजी, कबड्डी, कुश्ती, एथलेटिक्स और बैडमिंटन जैसी स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ियों से पदक की उम्मीद की जा रही है।
भारतीय दल में अनुभवी खिलाड़ियों के साथ बड़ी संख्या में युवा चेहरे भी शामिल हैं, जिनके लिए यह पहला बड़ा महाद्वीपीय मंच होगा। ऐसे आयोजनों में मिला अनुभव आगे की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में काम आता है।
