सौ साल बाद मिली नई जंगली बिल्ली: बोलीविया के बादल वाले जंगलों में पहचानी गई नन्ही टिल्कायो

ला पाज़: दक्षिण अमेरिकी देश बोलीविया में वैज्ञानिकों ने जंगली बिल्ली की एक ऐसी प्रजाति की पहचान की है, जिसके बारे में अब तक दुनिया को जानकारी नहीं थी। खास बात यह है कि यह बिल्ली जंगल में छिपी हुई नहीं मिली, बल्कि एक वन्यजीव आश्रय केंद्र में वर्षों से मौजूद थी, जहां उसे एक स्थानीय परिवार ने बचाकर पहुंचाया था। वैज्ञानिकों ने गुरुवार को शोध पत्रिका करंट बायोलॉजी में इसका ब्योरा प्रकाशित किया।
शोधकर्ताओं के मुताबिक एक सदी से भी ज्यादा समय बाद यह पहला मौका है, जब किसी नई जीवित जंगली बिल्ली की प्रजाति को औपचारिक रूप से पहचाना और नाम दिया गया है। इससे पहले ऐसी पहचान 1923 में हुई थी, जब उरुग्वेयन पम्पास कैट को अलग प्रजाति माना गया था।
छोटे आकार ने खींचा ध्यान
बोलीविया की जीवविज्ञानी पाओला नोगालेस-अस्कारुंज ने जब इस बिल्ली को पहली बार देखा तो उसके छोटे आकार ने उनका ध्यान खींचा। वह युंगास क्षेत्र के एक वन्यजीव आश्रय केंद्र में स्वयंसेवा करती थीं और उनके एक सहयोगी को इस बिल्ली का रूप बाकी बिल्लियों से अलग लगा था। करीब दस साल के इस नर जानवर की लंबाई सिर से पूंछ के आधार तक करीब 46 सेंटीमीटर और वजन महज 1.4 किलोग्राम है। हल्के भूरे शरीर पर तेंदुए जैसी गहरी धारियां और धब्बे इसकी पहचान हैं।
तीस से ज्यादा बिल्लियों के जीनोम की तुलना
यह अलग प्रजाति है या नहीं, इसका उत्तर डीएनए जांच से मिला। शोधकर्ताओं ने दक्षिण अमेरिका के अलग-अलग इलाकों की 30 से ज्यादा बिल्लियों के पूरे जीनोम की तुलना की, जिनमें कोलंबिया, पेरू और ब्राजील की बिल्लियां शामिल थीं। जहां ताजा नमूने उपलब्ध नहीं थे, वहां संग्रहालयों में सुरक्षित हड्डियों और खाल से डीएनए लिया गया। जांच में सामने आया कि इस बिल्ली की वंशावली करीब 14 लाख साल पहले अपनी करीबी प्रजातियों से अलग हो गई थी।
स्थानीय ज्ञान को मिला सम्मान
- नाम: नई प्रजाति को लेपर्डस टिल्कायो नाम दिया गया है।
- कहां से आया नाम: एंडीज के उष्णकटिबंधीय बादल वाले जंगलों में रहने वाले समुदाय इस जानवर के लिए पहले से यही नाम इस्तेमाल करते रहे हैं।
- कितनी प्रजातियां: डीएनए विश्लेषण से दक्षिण अमेरिका के टाइगर कैट समूह में अब कम से कम पांच अलग प्रजातियों के संकेत मिले हैं।
अध्ययन के सह-लेखक और यूनिवर्सिटी ऑफ एंटवर्प के विकासवादी जीवविज्ञानी जोनास लेस्क्रोआर्ट ने कहा कि बिल्ली परिवार जैसे अच्छी तरह अध्ययन किए गए समूह में भी ऐसी जैव विविधता छिपी हो सकती है, जिसके बारे में वैज्ञानिकों को पता नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसी खोजों में तेजी लाने की जरूरत है।
वैज्ञानिकों को अभी यह नहीं पता कि जंगल में इन बिल्लियों की कुल संख्या कितनी है और उनका असली भौगोलिक दायरा कहां तक फैला है। अब तक इसकी मौजूदगी सिर्फ युंगास के जंगलों में पक्के तौर पर दर्ज हुई है। शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि नई पहचान इन जंगलों को बचाने में मदद करेगी, जिन पर कटाई और खनन का दबाव लगातार बढ़ रहा है।
