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सेमीकॉन इंडिया 2026 में निवेश की बड़ी प्रतिबद्धताएं, 52 देशों की 600 से अधिक कंपनियां जुटीं

20 September 2026
सेमीकॉन इंडिया 2026 में निवेश की बड़ी प्रतिबद्धताएं, 52 देशों की 600 से अधिक कंपनियां जुटीं

नई दिल्ली: सेमीकॉन इंडिया 2026 में वैश्विक चिप उद्योग की कंपनियों ने भारत में सहयोग और विस्तार के लिए बड़ी भागीदारी दिखाई। उद्योग जगत के अनुसार यह कुशल स्थानीय प्रतिभा और केंद्र तथा राज्य सरकारों की नीतियों के कारण संभव हुआ। इस आयोजन में 52 देशों की 600 से अधिक कंपनियों और 40,000 से ज्यादा आगंतुकों ने हिस्सा लिया।

12 अरब डॉलर के निवेश प्रस्तावों की उम्मीद

सरकार ने सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र के लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये की सेमीकॉन 2.0 योजना की घोषणा की है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस आयोजन के दौरान 12 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश प्रस्तावों की उम्मीद जताई। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि नीति की निरंतरता और राज्यों की सक्रियता ने वैश्विक कंपनियों का भरोसा बढ़ाया है।

किस कंपनी ने कितने निवेश की बात कही

  • एप्लाइड मैटेरियल्स: कंपनी ने 48,000 करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है।
  • लैम रिसर्च: कंपनी ने 10,000 करोड़ रुपये के निवेश की बात कही है।
  • टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स: गुजरात के धोलेरा और असम में इकाइयों के लिए 1.18 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया गया है।
  • एएसएमएल: कंपनी ने भारत में अपना कार्यालय खोल लिया है।

300 मिलीमीटर फैब का पहला ग्राहक

टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स 300 मिलीमीटर सेमीकंडक्टर फैब का पहला ग्राहक है। इस इकाई की उत्पादन क्षमता प्रति माह 50,000 वेफर्स बताई गई है। चिप निर्माण की इस क्षमता को घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि अभी देश की बड़ी जरूरत आयात से पूरी होती है।

सेमीकंडक्टर उद्योग में निवेश का असर सीधे तौर पर मोबाइल, वाहन, दूरसंचार उपकरण और औद्योगिक इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों पर पड़ता है। इन क्षेत्रों में चिप की उपलब्धता बढ़ने से उत्पादन लागत और आपूर्ति शृंखला दोनों पर असर पड़ता है। यही वजह है कि इस आयोजन में आई निवेश प्रतिबद्धताओं को उद्योग जगत ध्यान से देख रहा है।

आयोजन में शामिल कंपनियों में चिप डिजाइन, उपकरण निर्माण, सामग्री आपूर्ति और पैकेजिंग से जुड़ी इकाइयां शामिल रहीं। इतनी बड़ी संख्या में देशों और कंपनियों की भागीदारी को आयोजकों ने भारत के चिप बाजार में बढ़ती वैश्विक दिलचस्पी का संकेत बताया।