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प्रत्यक्ष कर संग्रह 13 प्रतिशत बढ़कर 12.12 लाख करोड़ रुपये के पार, रिफंड में भी 29 प्रतिशत की उछाल

19 September 2026
प्रत्यक्ष कर संग्रह 13 प्रतिशत बढ़कर 12.12 लाख करोड़ रुपये के पार, रिफंड में भी 29 प्रतिशत की उछाल

नई दिल्ली: चालू वित्त वर्ष में सरकार की कर वसूली मजबूत गति से आगे बढ़ रही है। शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 17 सितंबर तक 13 प्रतिशत बढ़कर 12.12 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड की ओर से शुक्रवार को जारी आंकड़ों में यह जानकारी सामने आई। कर संग्रह में यह बढ़ोतरी आर्थिक गतिविधियों में तेजी और कंपनियों के बेहतर मुनाफे का संकेत मानी जा रही है।

आंकड़ों के मुताबिक कॉरपोरेट कर संग्रह में सबसे तेज उछाल दर्ज हुई है। यह 19.48 प्रतिशत बढ़कर करीब 5.56 लाख करोड़ रुपये रहा। वहीं गैर-कॉरपोरेट कर, जिसमें व्यक्तिगत करदाता और हिंदू अविभाजित परिवार शामिल हैं, छह प्रतिशत की बढ़त के साथ 6.16 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा।

शेयर बाजार से जुड़े कर में बड़ा उछाल

प्रतिभूति लेनदेन कर यानी एसटीटी से होने वाली वसूली में सबसे बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिली है। एक अप्रैल से 17 सितंबर के बीच यह 53 प्रतिशत बढ़कर 40,214 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। यह आंकड़ा शेयर बाजार में लेनदेन की बढ़ी हुई गतिविधि को दर्शाता है।

मुख्य आंकड़े एक नजर में

  • सकल संग्रह: 15 प्रतिशत बढ़कर 14.32 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा।
  • अग्रिम कर: 16.18 प्रतिशत की बढ़त के साथ करीब 5.22 लाख करोड़ रुपये रहा।
  • कॉरपोरेट अग्रिम कर: 18 प्रतिशत बढ़कर 4.16 लाख करोड़ रुपये से ऊपर पहुंचा।
  • गैर-कॉरपोरेट अग्रिम कर: 9.24 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 1.06 लाख करोड़ रुपये रहा।

रिफंड भी तेजी से जारी

करदाताओं के लिहाज से सबसे राहत भरा आंकड़ा रिफंड का है। इस अवधि में जारी किए गए रिफंड 29.19 प्रतिशत बढ़कर 2.20 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहे। बोर्ड के अनुसार रिफंड में यह उछाल प्रशासनिक दक्षता और प्रक्रिया में बढ़ी पारदर्शिता को दर्शाता है।

अग्रिम कर के आंकड़े अर्थव्यवस्था की सेहत का शुरुआती संकेतक माने जाते हैं, क्योंकि कंपनियां और करदाता अपनी अनुमानित आय के आधार पर यह कर किस्तों में जमा करते हैं। इसमें दर्ज हुई दोहरे अंक की वृद्धि बताती है कि आय को लेकर उम्मीदें मजबूत बनी हुई हैं।

सकल और शुद्ध दोनों आंकड़ों में बढ़ोतरी का मतलब है कि रिफंड तेजी से लौटाने के बावजूद सरकार के खजाने में शुद्ध रूप से अधिक राशि पहुंची है। इससे बुनियादी ढांचे और कल्याणकारी योजनाओं पर होने वाले खर्च के लिए संसाधन जुटाने में मदद मिलती है।